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Congress: 'आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की जरूरत', कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
Thu, 21 May 2026 03:18 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 21 May 2026 03:18 PM IST
सार
कांग्रेस ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की मांग की है। जयराम रमेश ने कहा कि बढ़ती महंगाई, घटते निवेश और चीन से आयात के कारण अर्थव्यवस्था संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि डर के माहौल और पूंजीवाद की वजह से निजी निवेश नहीं बढ़ रहा है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
- फोटो : एएनआई
विस्तार
कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अर्थव्यवस्था पर नए ज्ञान की जरूरत है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री 'ज्ञानेश' (मुख्य चुनाव आयुक्त) के जरिए चुनाव मैनेज कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर उन्हें नए ज्ञान की जरूरत है। उन्होंने कहा हमें इकोनॉमिक पॉलिसी बनाने में बड़े बदलाव की जरूरत है, लेकिन मोदी सरकार के पास आइडिया खत्म हो गए हैं। अब तो सरकार के समर्थक भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं जाहिर करने लगे हैं।
जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि देश में महंगाई का अनुमान बढ़ गया है और विकास दर के अनुमान में गिरावट आई है। विदेशी निवेश (FDI) लगातार कम हो रहा है। सप्लाई चेन का प्रबंधन इतना खराब है कि प्रधानमंत्री खुद उपभोक्ताओं से अपनी खपत कम करने की अपील कर रहे हैं। कांग्रेस लंबे समय से निवेश के खराब माहौल पर आवाज उठा रही है।
कांग्रेस नेता के अनुसार, निजी निवेश बढ़ाए बिना आर्थिक विकास को तेज नहीं किया जा सकता। निजी निवेश इसलिए नहीं बढ़ रहा क्योंकि लोगों की वास्तविक मजदूरी स्थिर है। इससे बाजार में सामान की मांग कम हो गई है। जब मांग ही नहीं होगी, तो कंपनियों के पास निवेश करने का कोई कारण नहीं बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स नोटिस, छापेमारी और जांच एजेंसियों के डर की वजह से निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
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चीन से होने वाले भारी आयात की वजह से स्थानीय सामान की मांग खत्म हो रही है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के करीबी दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए व्यापार का केंद्रीकरण किया जा रहा है। इस क्रोनीइज्म का सबसे चमकदार उदाहरण मोदानी है। कॉरपोरेट जगत के पास स्वतंत्र रूप से निवेश करने और उससे जुड़े जोखिम उठाने का बहुत कम इंसेंटिव बचा है, क्योंकि मुनाफा मोदी सरकार के 'चंदा लो, धंधा दो' काउंटर पर भुगतान करके भी आसानी से कमाया जा सकता है।
ये भी पढ़ें: West Bengal: अभिषेक बनर्जी को राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
कॉर्पोरेट टैक्स की दरें सबसे कम हैं और कंपनियों की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर है। शेयर बाजार भी ऊपर दिख रहा है, लेकिन जमीन पर निवेश गायब है। जो लोग निवेश कर सकते हैं, वे विदेशों का रुख कर रहे हैं। निवेश की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन वे असल में कितनी पूरी होती हैं, यह एक बड़ा सवाल है। रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इटली की प्रधानमंत्री को टॉफी बांटने और आत्म-महिमामंडन में व्यस्त हैं, जबकि देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।
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जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि देश में महंगाई का अनुमान बढ़ गया है और विकास दर के अनुमान में गिरावट आई है। विदेशी निवेश (FDI) लगातार कम हो रहा है। सप्लाई चेन का प्रबंधन इतना खराब है कि प्रधानमंत्री खुद उपभोक्ताओं से अपनी खपत कम करने की अपील कर रहे हैं। कांग्रेस लंबे समय से निवेश के खराब माहौल पर आवाज उठा रही है।
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कांग्रेस नेता के अनुसार, निजी निवेश बढ़ाए बिना आर्थिक विकास को तेज नहीं किया जा सकता। निजी निवेश इसलिए नहीं बढ़ रहा क्योंकि लोगों की वास्तविक मजदूरी स्थिर है। इससे बाजार में सामान की मांग कम हो गई है। जब मांग ही नहीं होगी, तो कंपनियों के पास निवेश करने का कोई कारण नहीं बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स नोटिस, छापेमारी और जांच एजेंसियों के डर की वजह से निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
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चीन से होने वाले भारी आयात की वजह से स्थानीय सामान की मांग खत्म हो रही है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के करीबी दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए व्यापार का केंद्रीकरण किया जा रहा है। इस क्रोनीइज्म का सबसे चमकदार उदाहरण मोदानी है। कॉरपोरेट जगत के पास स्वतंत्र रूप से निवेश करने और उससे जुड़े जोखिम उठाने का बहुत कम इंसेंटिव बचा है, क्योंकि मुनाफा मोदी सरकार के 'चंदा लो, धंधा दो' काउंटर पर भुगतान करके भी आसानी से कमाया जा सकता है।
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कॉर्पोरेट टैक्स की दरें सबसे कम हैं और कंपनियों की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर है। शेयर बाजार भी ऊपर दिख रहा है, लेकिन जमीन पर निवेश गायब है। जो लोग निवेश कर सकते हैं, वे विदेशों का रुख कर रहे हैं। निवेश की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन वे असल में कितनी पूरी होती हैं, यह एक बड़ा सवाल है। रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इटली की प्रधानमंत्री को टॉफी बांटने और आत्म-महिमामंडन में व्यस्त हैं, जबकि देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।