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भारत-चीन सीमा पर गतिरोध: कांग्रेस का दावा- डॉ. मनमोहन सिंह ने 21 दिन में सामान्य किए थे हालात!

Tue, 12 Oct 2021 06:22 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 12 Oct 2021 06:22 PM IST
सार

पवन खेड़ा के मुताबिक, कोर कमांडर स्तर की बैठकों के 13 दौर पूरे होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। चीनी सैनिक बेशर्मी से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे जवान सीमाओं पर उन्हें बहादुरी से रोक रहे हैं। दूसरी तरफ, यह सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री, चीन का नाम लेने और उन्हें जवाबदेह ठहराने से भी डर रहे हैं...

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Congress asked questions to PM Modi for Chinese incursions in Ladakh, Arunachal Pradesh and Barahoti and about the stand-off
भारत-चीन गतिरोध - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लद्दाख में डेढ़ साल से विवाद खत्म नहीं हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने तीन सप्ताह में चीन को समझा दिया था। याद रखना चाहिए, ये वही थिएटर है जहां डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। सबसे बड़ा अंतर यह है कि डॉ. मनमोहन सिंह 21 दिनों के भीतर इस स्थिति को हल करने में सक्षम थे। आज डेढ़ वर्ष बाद भी धरातल पर कोई प्रगति दिखाई नहीं पड़ रही। गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में यह दावा किया है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन का नाम लेने से परहेज कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ही तो कहा था कि 'भारतीय क्षेत्र का एक इंच भी नहीं' दिया गया था। अब दोनों देशों के बीच सैन्य वार्ता के 13 दौर पूरे हो चुके हैं। उसमें क्या चर्चा हुई है, देश को बताएं। दूसरी तरफ सेना प्रमुख ने कहा, चीन यहां रहने के लिए है।

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पवन खेड़ा के मुताबिक, कोर कमांडर स्तर की बैठकों के 13 दौर पूरे होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। चीनी सैनिक बेशर्मी से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे जवान सीमाओं पर उन्हें बहादुरी से रोक रहे हैं। दूसरी तरफ, यह सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री, चीन का नाम लेने और उन्हें जवाबदेह ठहराने से भी डर रहे हैं। अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि जब उत्तराखंड में टुन जून ला दर्रे को पार करते हुए बाराहोती के निकट तक चीनी घुसपैठ देखी गई थी। अरुणाचल प्रदेश में तवांग पर चीनी सैनिक आ जाते हैं। हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में तो चीन ने लॉजिस्टिक सुविधा तक का इंतजाम कर लिया है। आर्टिलरी यूनिट और एक वायु रक्षा बेस भी स्थापित हो गया है। मतलब, चीन ने वहां पर व्यापक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर लिया है। उत्तरी क्षेत्रों में भारत के सामरिक हितों के लिए ये एक बड़ा संभावित खतरा है।
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विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि एलएसी पर जो स्थिति बिगड़ी थी, वह चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने के एकतरफा प्रयासों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के कारण हुई थी। यह आवश्यक है कि चीनी पक्ष शेष क्षेत्रों में उचित कदम उठाए, ताकि शांति बहाल हो सके। पवन खेड़ा ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे हैं। पहला, उन्होंने देश से झूठ क्यों बोला कि किसी भी चीनी ने भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है। दूसरा, कैसे 100 से अधिक चीनी सैनिकों ने उत्तराखंड में टुन जून ला दर्रे को पार करते हुए बाराहोटी के पास भारतीय संप्रभु क्षेत्र में पांच किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया था। 30 अगस्त, 2021 को चीन के सैनिक तीन घंटे से अधिक समय तक वहां कैसे रहे। क्या यह सरकार और इसकी एजेंसियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में विफल नहीं हुई हैं।

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कांग्रेस नेता ने तीसरा सवाल ये पूछा है कि पिछले कुछ वर्षों में चीनी घुसपैठ लगभग सभी क्षेत्रों में हुई है। लद्दाख से उत्तराखंड तक और सिक्किम से अरुणाचल प्रदेश तक घुसपैठ हुई है। चीन, एलएसी के साथ अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। वह भारतीय क्षेत्र में बार-बार घुसपैठ कर रहा है। भारत सरकार खामोश है। भारत के सेना प्रमुख ने भी कहा, 'चीन यहां रहने के लिए है'। प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री चुप क्यों हैं? चीनी घुसपैठ के निहितार्थ अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले देपसांग और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर पर सरकार कुछ साफ नहीं बता रही है। खासकर, जब पीएलए, भारत के लिए दो अत्यंत रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डी-एस्केलेशन पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।

अगस्त में 12वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद, इस बात पर आपसी सहमति बनी थी कि गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों के सैनिक पीछे हटेंगे। इससे विपरीत चीन को दौलत बेग ओल्डी सेक्टर के साथ बड़े पैमाने पर सेना को मजबूत करने का मौका मिल गया। वहां भारी संख्या में पीएलए ने अपने सैनिक तैनात कर दिए, बल्कि हथियार प्रणाली को भी उन्नत कर लिया। वहां पर अब उन्नत एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है। इसे डेमचोक सेक्टर के साथ तैनात किया गया है। यह 400 किमी के क्षेत्र में हवाई जहाजों के लिए खतरा है। यहां से लगभग पूरा जम्मू और कश्मीर और लद्दाख कवर हो सकता है।

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