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कोरोनाकाल में सियासतदानों को भी चाहिए 'प्राण वायु', कांग्रेस के लिए 'करो या मरो' तो भाजपा के सामने छवि बचाने की चुनौती

Mon, 17 May 2021 05:27 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 May 2021 05:27 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी के लिए यह संकट वाला काल है। अगर भविष्य में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का मोर्चा बनता है तो उसका नेतृत्व करने या मजबूत स्थिति में होने के लिए कांग्रेस पार्टी को कुछ अलग से ऐसा करना होगा, जिससे विपक्षी दलों को यह विश्वास हो कि कांग्रेस अब भाजपा को चुनौती दे सकती है...

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Congress and opposition is looking opportunity to raise the mismanagement of Modi Government on coronavirus treatment
पीएम मोदी की आलोचना करने वाले लगे पोस्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोनाकाल में संकट, केवल मरीजों पर ही नहीं है, बल्कि सियासतदान भी इसके जरिए 'प्राण वायु' लेना चाह रहे हैं। प्रमुख विपक्षी दल 'कांग्रेस पार्टी' के लिए 'करो या मरो' की स्थिति है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को कहना पड़ रहा है कि मुझे गिरफ्तार करो। दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम गुजरात में कोविड की वजह से मारे गए लोगों की सूची निकाल लाते हैं। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह व पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिख दिया। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं दूसरे वरिष्ठ नेता एकाएक 'मददगार' बन गए हैं। भाजपा के सामने अपनी छवि बचाने की चुनौती है।

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कोरोना संक्रमण से मुकाबला करने के लिए वैक्सीन, अस्पताल, दवा और वैज्ञानिकों की चेतावनी को नजरअंदाज करना पार्टी को भारी पड़ रहा है। भाजपा को छवि की इतनी अधिक चिंता है कि जब दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने वाले पोस्टर लगे तो पुलिस ने अनेक लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इस पोस्टर को ही अपनी प्रोफाइल तस्वीर बना लिया है। इस पोस्टर में लिखा था 'मोदी जी, हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी'।
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बता दें कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों को उम्मीद थी कि ये चुनाव उनके हितों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। भाजपा इस इंतजार में थी कि पश्चिम बंगाल में उन्हें जीत मिलती है तो कोरोना संक्रमण और किसान आंदोलन जैसे मुद्दों पर सरकार की जो किरकिरी हुई है, उससे निजात पाई जा सकती है। बंगाल हारने के बाद भाजपा पर विपक्षी दलों का हल्लाबोल तेज हो गया।

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हालांकि इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी के हाथ ऐसा कुछ नहीं लगा, जिससे पार्टी को कुछ बल मिल पाता। नतीजा, कांग्रेस पार्टी ने तय किया कि अब कोरोनाकाल के जरिए ही 'प्राण वायु' का इंतजाम किया जाए। अप्रैल के मध्य तक पार्टी शांत तरीके से, यानी सोशल मीडिया के माध्यम से या बैठकें कर मोदी सरकार को घेर रही थी। युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी ने तभी 'मददगार' प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों की सहायता करनी शुरू कर दी। आईसीयू बेड, ऑक्सीजन और दवाओं के संकट से जूझ रहे मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए यह 'मददगार' प्लेटफॉर्म किसी वरदान से कम नहीं था।

जब यह अभियान सुपरहिट हो गया तो कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी रणनीति बदल दी। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी खुलकर सामने आ गईं। उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कोरोना संकट से बाहर निकलने के लिए कई सुझाव दिए। राहुल गांधी ने भी पीएम मोदी को पत्र लिख दिया। इसके बाद कांग्रेस सहित 12 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजी। इसमें कई सुझाव दिए गए थे।

कांग्रेस पार्टी के लिए यह दोहरे संकट वाला काल है। एक, अगर भविष्य में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का मोर्चा बनता है तो उसका नेतृत्व करने या मजबूत स्थिति में होने के लिए कांग्रेस पार्टी को कुछ अलग से ऐसा करना होगा, जिससे विपक्षी दलों को यह विश्वास हो कि कांग्रेस अब भाजपा को चुनौती दे सकती है। दूसरा, कांग्रेस पार्टी को अपना घर भी संभालना है। पिछले दिनों कई अलग दिशाओं से ऐसी आवाजें आती रही हैं, जो पार्टी की एकता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। इन सबके चलते पार्टी ने 'मददगार' अभियान के जरिए 'ऑक्सीजन' लेना बेहतर समझा। कांग्रेस पार्टी ने देश के तकरीबन हर हिस्से में यह अभियान शुरू कर दिया। मददगार बने कई नेताओं को पुलिस पूछताछ का सामना करना पड़ा। हालांकि पार्टी नेताओं को लगता है कि इससे कांग्रेस मजबूत हो रही है। कांग्रेस कोविड रिलीफ टास्क फोर्स की निगरानी करने की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को सौंपी गई है। वे इस बाबत 19 मई को कांग्रेस की प्रदेश यूनिटों के पदाधिकारियों से अपडेट लेंगे।

दूसरी तरफ, भाजपा को भी अपनी छवि की चिंता सता रही है। कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों ने जब पीएम मोदी पर हमला बोला तो भाजपा के अनेक नेता बचाव में उतरे। यहां तक कि पुलिस से कहा गया कि जो कोई भी पीएम के खिलाफ पोस्टर लगाता हुआ मिले, उसे गिरफ्तार कर लिया जाए। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल कहते हैं कि भाजपा तो पहले से ही छवि निर्माण पर ध्यान दे रही है। अगर समय रहते कोरोना संक्रमण पर ध्यान दिया जाता तो आज नदियों में शव नहीं मिलते। कोरोना संक्रमण से जंग करने के लिए भारत के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद थे, लेकिन मोदी सरकार की गलत रणनीति ने सारा काम बिगाड़ दिया। मोदी सरकार ने वैक्सीन अपने लोगों को लगाने की बजाए, उसे दूसरों मुल्कों में भेज दिया। संसद की स्टैंडिंग कमेटी ऑन हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ने 16 अक्टूबर, 2020 को वैक्सीन को लेकर जो सुझाव दिए थे, भारत सरकार ने उनकी पूर्ण अनदेखी की है। ये सब बातें लोगों के समक्ष रखी जा रही हैं। अब यह महामारी चारों ओर विकराल रूप से फैल चुकी है। केस भले ही कम हो रहे हैं, लेकिन अभी तीसरी लहर का खतरा बरकरार है। सरकार को वैक्सीन कंपनियों पर दबाव बनाकर तीसरी लहर आने से पहले 60 फीसदी से अधिक लोगों को वैक्सीन लगानी होगी, तभी महामारी की चेन तोड़ी जा सकती है।

भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कोरोना महामारी को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा, जिन राज्यों में कांग्रेस पार्टी की सरकार है, उन्हें वहां पर सलाह देनी चाहिए कि कोरोना से कैसे निपटा जाए। अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और पंजाब में कांग्रेस। पंजाब में मौजूदा स्थितियों के मद्देनजर भाजपा के लिए कोई जनाधार नहीं दिख रहा। उत्तर प्रदेश में पार्टी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा की सोच है कि कोरोना में खराब हो रही छवि को जल्द नहीं सुधारा गया तो उत्तर प्रदेश चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने कोरोना को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। प्रियंका ने इंस्टाग्राम पर कहा है, इस समय अगर वे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री होतीं तो सच्चाई छुपाए बिना सभी संसाधन महामारी से लड़ने पर लगातीं। सरकार को लोगों के प्रति आक्रामक होने की बजाय उनके सहयोग के लिए दवा और उन्हें ऑक्सीजन मुहैया कराने में अपनी क्षमता का इस्तेमाल करतीं। खास तौर पर गरीब वर्ग का ध्यान रखतीं, जिसे ऐसे हालात में आर्थिक मदद की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियां खोखली हैं। ये नीतियां भारतीयों के विकास, सशक्तिकरण और सुरक्षा की बजाय सिर्फ पीएम मोदी के महिमांडन और उनकी पार्टी के विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देने के मकसद से बनाई जाती हैं।

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