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Hindi News ›   India News ›   Cong 'warns' people EAC-PM Bibek Debroy has 'sounded bugle for junking Constitution'

Congress: कांग्रेस का प्रधानमंत्री की EAC के प्रमुख पर पलटवार, कहा- संविधान को खत्म करने का बिगुल फूंक दिया

Tue, 15 Aug 2023 08:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 15 Aug 2023 08:51 PM IST
सार

Congress: कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने उस संविधान को खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है, जिसके प्रमुख वास्तुकार भीमराव अंबेडकर थे।

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Cong 'warns' people EAC-PM Bibek Debroy has 'sounded bugle for junking Constitution'
Congress Leader Jairam Ramesh - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने उस संविधान को खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है, जिसके प्रमुख वास्तुकार भीमराव अंबेडकर थे। पार्टी ने लोगों को इसके बारे में आगाह किया है। 

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक लेख में देबरॉय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा, यह हमेशा संघ परिवार का एजेंडा रहा है। सावधान रहें, भारत। उन्होंने कहा, इस 77वें स्वाधीनता दिवस पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख ने उस संविधान को खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है, जिसके प्रमुख शिल्पी डॉ. अंबेकर थे। वह चाहते हैं कि देश एक बिल्कुल नए ब्रांड को अपनाए। 
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देबरॉय ने अपने लेख में लिखा है, हमारा मौजूदा संविधान काफी हद तक 1935 के भारत सरकार अधिनियम पर आधारित है। इस अर्थ में यह एक औपनिवेशिक विरासत भी है। 2002 में संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित एक आयोग द्वारा एक रिपोर्ट आई थी, लेकिन यह आधा-अधूरा प्रयास था। कानून में सुधार के कई पहलुओं की तरह यहां और दूसरे बदलाव से काम नहीं चलेगा। हमें पहले सिद्धांतों से शुरुआत करनी चाहिए, जैसा कि संविधान सभा की बहस में हुआ था। 2047 के लिए भारत को किस संविधान की जरूरत है?
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उन्होंने कहा, 'हम जो बहस करते हैं, वह संविधान से शुरू और खत्म होती है। कुछ संशोधनों से काम नहीं चलेगा। हमें ड्राइंग बोर्ड पर वापस जाना चाहिए और पहले सिद्धांतों से शुरू करना चाहिए, यह पूछना चाहिए कि प्रस्तावना में इन शब्दों का अब क्या मतलब है: समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, न्याय, स्वतंत्रता और समानता। हम लोगों को खुद को एक नया संविधान देना होगा।'

 

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