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सीमा पर घर-घर बनने लगे पक्के बंकर, जानमाल के नुकसान से बचने को उठाया कदम

Sat, 01 Oct 2016 10:05 PM IST
बृजेश कुमार सिंह (आरएस पुरा सेक्टर से)
बृजेश कुमार सिंह (आरएस पुरा सेक्टर से) Updated Sat, 01 Oct 2016 10:05 PM IST
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Concrete bunker on the border began to become a household, to avoid loss of life or damage
आरएस पुरा के गांव अब्दुल्लियां में बने बंकर में सामान रखती युवती - फोटो : amarujala

पाकिस्तान की नापाक हरकतों से छुटकारा पाने और परिवार की सलामती के लिए सीमावर्ती ग्रामीणों ने रास्ता खोज निकाला है। घर-घर पक्के बंकर बनाए जाने लगे हैं। लोगों ने बार-बार घर बार छोड़ने और जानमाल के नुकसान से आजिज आकर यह रास्ता अख्तियार किया है। बार्डर से सटे अब्दुल्लियां गांव में रमेश लाल ने अपने मकान में पक्का बंकर बनवाया है।

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पहले उनका घर कच्चा था, जिसे गिरवाकर पक्का मकान बनवाया है। आरसीसी के लेंटरयुक्त इस बंकर में दो दरवाजे हैं। परिवार की युवती साक्षी शुक्रवार को बंकर की साफ-सफाई में जुटी रही ताकि किसी प्रकार की आपात स्थिति में यहां शरण ली जा सके। पिछले साल 28 अगस्त को हुई पाक गोलाबारी में रमेश ने अपने भाई पवन कुमार को खो दिया। पिता अजीत सिंह का हाथ काटना पड़ा।
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कहते हैं कि हर बार पाक की ओर से गोलाबारी किए जाने से थककर परिवार ने कच्चे मकान के स्थान पर बंकरयुक्त पक्का बनवाने का फैसला किया। गांव के ही सरकारी मुलाजिम अवतार सिंह ने भी अपने घर में बंकर बनवा लिया है। उन्होंने नौ फुट गहरे बंकर का निर्माण कराया है। छत डेढ़ फीट लेंटर की है। आठ गुणा 10 फीट के सीढ़ीयुक्त इस बंकर में रोशनी का भी प्रबंध है।

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गांव में एक सामुदायिक बंकर भी है

Concrete bunker on the border began to become a household, to avoid loss of life or damage
आरएस पुरा के गांव अब्दुल्लियां में पक्का बंकर बनाते लोग - फोटो : amarujala

अवतार और उनके बेटे नरेश कुमार का कहना है कि गांव में एक सामुदायिक बंकर है। बार्डर से उनका गांव बिलकुल करीब है। इस वजह से फायरिंग होने पर लोग या तो गांव में बने सामुदायिक बंकर में जाकर जान बचाते थे या फिर प्रशासन की ओर से बनाए गए कैंपों में।

इस वजह से उन्होंने घर में ही बंकर बनवाने का फैसला किया। यहां वक्त बेवक्त आस-पास के लोग भी शरण ले लेते हैं। उनका कहना है कि पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से सरहदी इलाकों में जोश है, लेकिन दहशत भी कम नहीं है। ना जाने कब पाक की ओर से गोलाबारी शुरू हो जाए और उनकी खुशियों को ग्रहण लग जाए।

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