दिवाला प्रक्रिया में शामिल कंपनियां बाहर से जुटा सकेंगी कर्ज, आरबीआई ने दी मंजूरी
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आरबीआई ने दिवाला कानून के तहत निपटान प्रक्रिया को सुगमता से बढ़ाने के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों को बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के जरिये धन जुटाने की मंजूरी दे दी है। इस कदम से बोली में शामिल कंपनियां मौजूदा कर्जदाताओं को भुगतान कर सकेंगी। मौजूदा दिशा निर्देशों के तहत ईसीबी से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल पुनर्भुगतान के लिए या घरेलू रुपये के कर्ज के भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता।
रिजर्व बैंक ने कहा, कॉरपोरेट दिवाला निपटान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत आवेदकों को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में मौजूदा कर्जदाताओं को भुगतान के लिए विदेशों से कर्ज जुटाना आकर्षक रहेगा। इसी के मद्देनजर वह सीआईआरपी के तहत ईसीबी में कर्ज जुटाने की मंजूरी दे रहा है।
रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आईबीसी के तहत निपटान एनसीएलटी द्वारा किया जाता है। हमने जो फैसला किया है उससे रातों रात गायब होने वाली कंपनियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है कि वे सिर्फ धन जुटाने के लिए कर्ज जुटाएं। सिर्फ वही कंपनियां जिनकी निपटान प्रक्रिया के तहत पहचान की गई है, इसका इस्तेमाल कर पाएंगी।
एनबीएफसी में बढ़ाएंगे तालमेल
बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ बेहतर तालमेल के तहत रिजर्व बैंक ने संपत्ति के लिए कर्ज देने वाली कंपनियों (एएफसी), कर्जदाता कंपनियों और निवेश कार्य करने वाली कंपनियों को एक ही खंड में रखने का फैसला किया है। एनबीएफसी के मामले में बेहतर तालमेल के लिए इस महीने के आखिर तक दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। इसके अलावा किसी खास क्षेत्र में निवेश करने वाली निवेश कंपनियों (सीआईसी) को छोड़कर सभी एनबीएफसी को बैंकों द्वारा दिये गए ऋण के जोखिम का आकलन किया जाएगा, जो मान्यता प्राप्त एजेंसी की रेटिंग पर आधारित होगा।
सभी क्षेत्रों में बढ़ाएंगे तरलता
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि हम लगातार तरलता की स्थिति पर निगाह बनाए हुए हैं और किसी भी क्षेत्र में नकदी की कमी नहीं आने देंगे। चालू वित्त वर्ष में खुला बाजार संचालन के तहत 2.36 लाख करोड़ रुपये डाले जाएंगे।