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सीबीआई चीफ: विवादित आईपीएस की नियुक्ति से बचेगी सरकार, एक दिन भी खाली नहीं रहनी चाहिए निदेशक की कुर्सी

Mon, 24 May 2021 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 24 May 2021 04:58 PM IST
सार

कैबिनेट सचिवालय से सेक्रेटरी सिक्योरिटी पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद कहते हैं, कायदे से सीबीआई जैसी अहम एजेंसी में बहादुर एवं निर्भीक लीडर का पद एक दिन भी खाली नहीं रहना चाहिए। वह भी ऐसे समय में, जब जांच एजेंसी के पास बैंक फ्रॉड, सुशांत सिंह राजपूत मामला और टीएमसी विधायकों की गिरफ्तारी जैसे बड़े केस हों, ऐसी स्थिति में निदेशक का होना बेहद जरूरी है...

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Committee Headed By Prime minister Modi To Meet Today On Deciding Next CBI Director General
सीबीआई - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

देश की शीर्ष जांच एजेंसी 'सीबीआई' के निदेशक का पद भरने के लिए सोमवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में सीबीआई प्रमुख के नाम पर मुहर लग सकती है। फरवरी में ऋषि कुमार शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद खाली पड़ा है। कैबिनेट सचिवालय से एडीशनल सेक्रेटरी पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद कहते हैं, कायदे से सीबीआई जैसी अहम एजेंसी में बहादुर एवं निर्भीक लीडर का पद एक दिन भी खाली नहीं रहना चाहिए। वह भी ऐसे समय में, जब जांच एजेंसी के पास बैंक फ्रॉड, सुशांत सिंह राजपूत मामला और टीएमसी विधायकों की गिरफ्तारी जैसे बड़े केस हों, ऐसी स्थिति में निदेशक का होना बेहद जरूरी है। ये बड़े निर्णय लेने का समय होता है। वैसे काम चलाने के लिए आप अतिरिक्त निदेशक को कार्यभार सौंप सकते हैं। मौजूदा स्थितियों में केंद्र सरकार इस पद पर विवादित आईपीएस की नियुक्ति से बचेगी। पिछली बार मीडिया में जितने भी नाम चल रहे थे, सरकार ने उनमें से किसी को नहीं लगाया। किसी को भनक तक नहीं थी कि ऋषि कुमार शुक्ला नए सीबीआई चीफ बनेंगे। इस बार मीडिया में राकेश अस्थाना, प्रवीण सिन्हा और लोकनाथ बेहरा के नाम चल रहे हैं।

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बता दें कि सीबीआई चीफ का पद कई माह से खाली पड़ा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। दो साल पहले जब तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा और नंबर दो पर काम कर रहे राकेश अस्थाना के बीच विवाद बढ़ गया तो इन दोनों अधिकारियों को अपने पद से हटना पड़ा था। अस्थाना के खिलाफ केस दर्ज हुए थे। हालांकि बाद में उन केसों से राकेश अस्थाना को क्लीन चिट मिलती चली गई। सीबीआई में उनके कथित भ्रष्टाचार पर फरवरी 2020 में क्लीन चिट दे दी गई। स्टर्लिंग बायोटेक भ्रष्टाचार मामले में अस्थाना को इस साल क्लीन चिट मिली है। सिविल सोसायटी के कई सदस्यों की दलील थी कि अस्थाना के सिर पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हाथ है। केंद्र सरकार ने अस्थाना को बीएसएफ का डीजी बना दिया और साथ ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख की जिम्मेदारी सौंप दी। अभी तक वे इन दोनों पदों पर काम कर रहे हैं। मीडिया में उनका नाम पहले नंबर पर चल रहा है।

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पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन आजाद के मुताबिक, सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट है कि सीबीआई में निदेशक का पद एक दिन भी खाली नहीं रहना चाहिए। कई ऐसे विषय सीबीआई जांच के दायरे में होते हैं, जिनमें सरकार पर आंच आने का खतरा बना रहता है। ऐसे गंभीर मामलों में त्वरित गति से निर्णय लेने पड़ते हैं। सीबीआई निदेशक एक ऐसा लीडर होता है जो बहादुर और निर्भीक हो। वह बिना किसी के दबाव में आए अपना काम करता रहे। सरकार के पास कई सप्ताह से दर्जनभर आईपीएस अफसरों का नाम है। इस सूची को सार्वजनिक करने में क्या गुरेज है। ये नाम क्यों छिपाए जाते हैं। विपक्षी दलों और लोगों को मालूम चले कि सरकार इस पद के लिए अच्छे आईपीएस का चुनाव करने जा रही है। तभी लोगों का विश्वास बनेगा कि देश की टॉप जांच एजेंसी की कमान ठीक हाथों में है या नहीं। सीबीआई जैसी संस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। यहां पर निर्विवाद छवि वाला वह आईपीएस होना चाहिए, जो ईमानदारी से और बिना किसी दबाव के नतीजा दे।

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सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में 1984 से लेकर 1987 बैच तक के अधिकारियों के नाम पर विचार किया जाएगा। यदि कमेटी में सहमति बनी, तो जांच एजेंसी के कार्यवाहक निदेशक प्रवीण सिन्हा का नाम फाइनल हो सकता है। सिन्हा 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। सरकार, पिछले निदेशक की तरह किसी ऐसे आईपीएस को नियुक्त कर सकती है, जिसका नाम अभी सामने नहीं आया है। वैसे कई माह से एनआईए के चीफ वाईसी मोदी, केरल के डीजीपी लोकनाथ बेहरा व उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी का नाम भी चर्चा में है।

सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा, जो मौजूदा कार्यवाहक निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उनका सीबीआई में लंबा कार्यकाल रहा है। प्रवीण सिन्हा, केंद्रीय जांच एजेंसी में एसपी, डीआईजी, ज्वाइंट डायरेक्टर और एडीशनल डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर काम कर चुके हैं। सिन्हा ने एसीबी और अहमदाबाद में डिप्टी डायरेक्टर पद पर काम किया है। उन्होंने बैंक धोखाधड़ी, सीरियल बम धमाके, कैट और ऑल इंडिया प्री मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट पेपर लीक मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी। सीबीआई में सिन्हा को क्राइम मैनुअल में बदलाव करने की जिम्मेदारी दी गई थी। केंद्रीय सतर्कता आयोग के विजिलेंस मैनुअल को भी उन्होंने ही ड्राफ्ट किया था। अगर 88 बैच में से किसी आईपीएस के नाम पर विचार होता है तो सिन्हा पहली पसंद बन सकते हैं।

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