{"_id":"63e59d680dad1af0220bd598","slug":"committee-constituted-to-analyze-information-given-on-compensation-to-anti-sikh-riot-victims-2023-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sikh Riots: सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को मुआवजे पर दी जानकारी का विश्लेषण करने को समिति गठित, मामले हैं लंबित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Sikh Riots: सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को मुआवजे पर दी जानकारी का विश्लेषण करने को समिति गठित, मामले हैं लंबित
Fri, 10 Feb 2023 06:57 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 10 Feb 2023 06:57 AM IST
सार
आयोग ने कहा, 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास में एक काला धब्बा थे। इसमें सिख समुदाय के हजारों निर्दोष लोगों का क्रूरतापूर्वक नरसंहार किया गया, उन्हें विस्थापित किया गया और शारीरिक, भावनात्मक रूप से परेशान और आर्थिक रूप से नष्ट कर दिया गया।
विज्ञापन
सिख विरोधी दंगा
- फोटो : गूगल
विस्तार
1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को दिए गए मुआवजे पर राज्यों की ओर से भेजी गई जानकारी का विश्लेषण करने और प्रभावित परिवारों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए सिख वकीलों वाली चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। यह जानकारी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने बृहस्पतिवार को दी।
आयोग ने कहा, 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास में एक काला धब्बा थे। इसमें सिख समुदाय के हजारों निर्दोष लोगों का क्रूरतापूर्वक नरसंहार किया गया, उन्हें विस्थापित किया गया और शारीरिक, भावनात्मक रूप से परेशान और आर्थिक रूप से नष्ट कर दिया गया। हालांकि, भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से कई राहत पैकेजों की घोषणा की गई थी, लेकिन ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राहत के संसाधान पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंचे हैं। 31 अक्तूबर, 1984 को 37 साल बीत जाने के बाद भी ये मामले लंबित हैं।
विज्ञापन
आयोग ने कहा, 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास में एक काला धब्बा थे। इसमें सिख समुदाय के हजारों निर्दोष लोगों का क्रूरतापूर्वक नरसंहार किया गया, उन्हें विस्थापित किया गया और शारीरिक, भावनात्मक रूप से परेशान और आर्थिक रूप से नष्ट कर दिया गया। हालांकि, भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से कई राहत पैकेजों की घोषणा की गई थी, लेकिन ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राहत के संसाधान पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंचे हैं। 31 अक्तूबर, 1984 को 37 साल बीत जाने के बाद भी ये मामले लंबित हैं।
विज्ञापन