फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Colonial cleanup in railway, Jamadars and Safailwalas now called Assistants

अब रेलवे में नहीं मिलेंगे जमादार और धोबी, दिखेंगे केवल सहायक

Tue, 05 Feb 2019 11:54 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 05 Feb 2019 11:54 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Colonial cleanup in railway, Jamadars and Safailwalas now called Assistants
भारतीय रेलवे

इसी साल की शुरुआत से रेलवे पर अब कोई जमादार नहीं होगा। अब इन लोगों को सहायक कहकर संबोधित किया जाएगा। अब यहां कोई सफाईवाला भी नहीं कहलाया जाएगा। अब सफाई करने वालों को हाउसकीपिंग असिस्टेंट कहा जाएगा। इसके साथ ही रेलवे पर काम करने वाले चौकीदार, कुक, पिओन्स और वेटर आदि को भी सहायक ही कहा जाएगा। अब ये सभी असिस्टेंट कहलाएंगे जो कि विभागों में बंटे होंगे।


loader

देश में सवच्छ भारत के तहत सफाई तो पहले शुरू हो चुकी थी लेकिन अब औपनिवेशिक सफाई की शुरुआत हुई है। ताकि यहां के सबसे बड़ी संख्या वाले सबसे पुराने कर्मियों को सम्मान मिल सके। रेलवे बोर्ड ने मान्यता प्राप्त श्रमिक संघों के साथ आंतरिक विचार-विमर्श करने के बाद ये फैसला लिया और बीते महीने इससे संबंधित नोटिफिकेशन सर्कुलेट किए गए।

इसका मतलब ये हुआ कि अब कुक और वेटर की ही तरह सफाई करने वाला, रोटी बनाने वाला या फिर चाय/कॉफी बनाने वाला भी सहायक ही कहलाया जाएगा। सूची तैयार करने वक्त अधिकारियों को पता चला कि कई उपाधि तो संगठन की स्थापना के समय से ही चली आ रही हैं। जैसे रेलवे की स्थापना साल 1853 में हुई है तो वहां काम करने वालों को मिली उपाधि भी तभी से चली आ रही हैं। उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। यहां तक कि इनमें से कई तरह की नौकरी में तो ओवर टाइम तक शामिल है।

इसके साथ ही लिफ्टर, रिकॉर्ड सॉर्टर, संदेशवाहक अब जनरल असिस्टेंट कहलाएंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि उपाधि में संशोधन का मतलब ये नहीं है कि मौजूदा कर्तव्य, जिम्मेदारियों, नियुक्ति प्रक्रिया, वेतन स्तर और पात्रता की शर्तों में भी बदलाव होगा। इनमें कोई बदलाव नहीं होगा।

ऑल इंडिया रेलवेमैन फैडेरेशन के सेक्रेटरी जनरल गोपाल मिश्रा का कहना है, "कर्मियों में असंतोष था। कई को लगता था कि ये उपाधि आज के समय में नीचा दिखाने वाली हैं। जबकि कई उपाधि ऐसे काम पर आधारित हैं जो कि आज के समय में हैं ही नहीं। ये किसी की प्रतिष्ठा से संबंधित होता है।"

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि ग्रुप डी (अब लेवल एक) की ये उपाधि अतीत से चली आ रही थीं। साथ ही औपनिवेशिक हैंगओवर की तरह थीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed