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तमिलनाडु: सीएम विजय के चुनाव को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती, जानें क्या लगे आरोप; AIADMK में फिर बगावत की अटकलें
Tue, 07 Jul 2026 08:06 PM IST
Pavan
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: Pavan
Updated Tue, 07 Jul 2026 08:06 PM IST
सार
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के त्रिची और पेरंबूर विधानसभा क्षेत्र चुनाव जीतने को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मुख्यमंत्री विजय को नोटिस जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।
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सीएम विजय के चुनाव को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। एक तरफ मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के 2026 विधानसभा चुनाव को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की बैठक से दो विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी कलह की अटकलों को तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री विजय के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार आर. डी. शेखर, जो 2026 के विधानसभा चुनाव में पेरंबूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ चुनाव लड़े थे, ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मुख्यमंत्री विजय को नोटिस जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।
यह भी पढ़ें- बंगाल: हाईकोर्ट से ममता बनर्जी को मिली सशर्त रैली की अनुमति, एक हजार से अधिक लोग नहीं होंगे शामिल
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याचिका में लगाए गए प्रमुख आरोप
याचिका में मुख्यमंत्री विजय के चुनाव को कई आधारों पर चुनौती दी गई है। इनमें प्रमुख आरोप हैं-
बड़े अंतर से जीते थे विजय
पेरंबूर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री विजय को 1,20,365 वोट मिले थे, जबकि डीएमके के आर. डी. शेखर को 66,650 वोट प्राप्त हुए थे। विजय ने 53,715 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल 2026 को मतदान हुआ था और 4 मई 2026 को परिणाम घोषित किए गए थे। इसी तरह की एक अन्य याचिका तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हारने वाले डीएमके उम्मीदवार इनिगो इरुधयराज ने भी मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ दायर की है।
AIADMK में फिर बढ़ी अंदरूनी कलह की चर्चा
इधर, एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी की अध्यक्षता में चेन्नई में आयोजित पार्टी की सलाहकार बैठक में दो विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी। इस बैठक में पूर्व मंत्री के. सी. वीरमणि और आर्कोट विधायक एस. एम. सुकुमार शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी कई नेता छोड़ चुके हैं पार्टी
इससे पहले पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर, एम. आर. विजयभास्कर, मरगथम कुमारावेल, एस. जयकुमार, पी. सत्यभामा और एसाक्की सुबाया सहित कई नेता विधायक पद से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो चुके हैं।
फ्लोर टेस्ट में किया था क्रॉस वोटिंग
के. सी. वीरमणि और एस. एम. सुकुमार उन 25 एआईएडीएमके विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 13 मई को विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया था। इस क्रॉस वोटिंग के कारण 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके सरकार को 144 वोट मिले थे, जबकि बहुमत के लिए 118 वोट ही पर्याप्त थे। बाद में दोनों नेताओं से जिला सचिव का पद वापस ले लिया गया था और उन्हें पार्टी में कम महत्व वाली जिम्मेदारियां दी गई थीं। हालांकि, अधिकांश बागी विधायक बाद में पलानीस्वामी के नेतृत्व में वापस आ गए थे।
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स्थानीय निकाय चुनाव पर फोकस
इस बैठक के दौरान पलानीस्वामी ने पार्टी नेताओं से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर एआईएडीएमके स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में राज्य की सत्ता में वापसी की राह आसान हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा टीवीके सरकार के पूरे कार्यकाल तक बने रहने की संभावना कम है। यह बैठक हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा और आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित की गई थी।
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मुख्यमंत्री विजय के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार आर. डी. शेखर, जो 2026 के विधानसभा चुनाव में पेरंबूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ चुनाव लड़े थे, ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मुख्यमंत्री विजय को नोटिस जारी करने का आदेश दिया और मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।
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याचिका में लगाए गए प्रमुख आरोप
याचिका में मुख्यमंत्री विजय के चुनाव को कई आधारों पर चुनौती दी गई है। इनमें प्रमुख आरोप हैं-
- चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल किया गया, जो चुनाव आयोग के निर्देशों के खिलाफ बताया गया है।
- नामांकन के दौरान दाखिल किए गए फॉर्म-26 में कथित विसंगतियां हैं।
- त्रिची और पेरंबूर के हलफनामों में नोटरी से जुड़े दस्तावेजों में विरोधाभास बताया गया है। दावा है कि दोनों हलफनामों में ऐसा प्रतीत होता है कि विजय एक ही दिन दो अलग-अलग नोटरी के सामने उपस्थित थे।
- आयकर बकाया की पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया है।
- सोशल मीडिया प्रचार पर हुए खर्च का सही हिसाब नहीं दिया गया।
- चुनाव खर्च तय सीमा से अधिक होने का आरोप लगाया गया है।
- चर्च और मंदिर परिसर में चुनाव प्रचार करने का आरोप भी लगाया गया है, जिसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण बताया गया है।
- सी. जोसेफ विजय (TVK): 1,20,365 वोट (विजेता)
- आर. डी. शेखर (DMK): 66,650 वोट
- जीत का अंतर: 53,715 वोट
बड़े अंतर से जीते थे विजय
पेरंबूर विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री विजय को 1,20,365 वोट मिले थे, जबकि डीएमके के आर. डी. शेखर को 66,650 वोट प्राप्त हुए थे। विजय ने 53,715 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल 2026 को मतदान हुआ था और 4 मई 2026 को परिणाम घोषित किए गए थे। इसी तरह की एक अन्य याचिका तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हारने वाले डीएमके उम्मीदवार इनिगो इरुधयराज ने भी मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ दायर की है।
AIADMK में फिर बढ़ी अंदरूनी कलह की चर्चा
इधर, एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी की अध्यक्षता में चेन्नई में आयोजित पार्टी की सलाहकार बैठक में दो विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी। इस बैठक में पूर्व मंत्री के. सी. वीरमणि और आर्कोट विधायक एस. एम. सुकुमार शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी कई नेता छोड़ चुके हैं पार्टी
इससे पहले पूर्व मंत्री डॉ. सी. विजयभास्कर, एम. आर. विजयभास्कर, मरगथम कुमारावेल, एस. जयकुमार, पी. सत्यभामा और एसाक्की सुबाया सहित कई नेता विधायक पद से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो चुके हैं।
फ्लोर टेस्ट में किया था क्रॉस वोटिंग
के. सी. वीरमणि और एस. एम. सुकुमार उन 25 एआईएडीएमके विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 13 मई को विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया था। इस क्रॉस वोटिंग के कारण 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके सरकार को 144 वोट मिले थे, जबकि बहुमत के लिए 118 वोट ही पर्याप्त थे। बाद में दोनों नेताओं से जिला सचिव का पद वापस ले लिया गया था और उन्हें पार्टी में कम महत्व वाली जिम्मेदारियां दी गई थीं। हालांकि, अधिकांश बागी विधायक बाद में पलानीस्वामी के नेतृत्व में वापस आ गए थे।
यह भी पढ़ें- बारुईपुर मामला: पीड़ित परिवार से मिले मुख्यमंत्री शुभेंदु, प्रगति की समीक्षा की; पुलिस की भूमिका की होगी जांच?
स्थानीय निकाय चुनाव पर फोकस
इस बैठक के दौरान पलानीस्वामी ने पार्टी नेताओं से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर एआईएडीएमके स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में राज्य की सत्ता में वापसी की राह आसान हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा टीवीके सरकार के पूरे कार्यकाल तक बने रहने की संभावना कम है। यह बैठक हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा और आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित की गई थी।