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Tamil Nadu: सीएम एमके स्टालिन ने शिक्षकों को दी सलाह, कहा- छात्रों में विकसित करें तर्कसंगत सोच
Sat, 20 Sep 2025 04:45 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 20 Sep 2025 04:45 PM IST
सार
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम मुप्पेरुम विझा में सीएम एमके स्टालिन ने कहा कि छात्रों को समानता और सामाजिक न्याय की आवश्यकता के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। छात्रों के लिए अच्छे रोल मॉडल पेश करें और स्वयं भी रोल मॉडल बनें। उन्हें नागरिक भावना सिखाएं।
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कार्यक्रम को संबोधित करते सीएम एमके स्टालिन।
- फोटो : PTI
विस्तार
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में तर्कसंगत सोच विकसित करें। उन्हें कैसे और क्यों जैसे प्रश्न पूछकर दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करें। छात्रों को समानता और सामाजिक न्याय की आवश्यकता के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। छात्रों के लिए अच्छे रोल मॉडल पेश करें और स्वयं भी रोल मॉडल बनें। उन्हें नागरिक भावना सिखाएं।
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि शिक्षकों को यह देखना चाहिए कि छात्रों में जातिवादी और लैंगिक भेदभाव की प्रवृत्ति न उभरे। सरकारी स्कूल जाने वाले छात्र गर्व का प्रतीक बन गए हैं। राज्य द्वारा संचालित स्कूलों के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सरकारी स्कूल के छात्रों को विदेशी देशों के दौरे पर ले जाया जाता है ताकि वे बाहरी दुनिया को समझ सकें और अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें।
मुख्यमंत्री ने डीएमके सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री नाश्ता योजना और कॉलेज शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 1,000 रुपये मासिक सहायता वाली योजना का भी जिक्र किया। स्टालिन ने कहा कि छात्रों को सही, उपयुक्त विषय-वस्तु दिखाई जानी चाहिए। गूगल वेब सर्च इंजन और एआई तक पहुंच पर विचार करते हुए छात्रों को केवल ऐसे तकनीक आधारित समाधानों पर निर्भर रहकर आत्मसंतुष्टि का भाव नहीं अपनाना चाहिए। छात्रों को मानवीय विचारों और तकनीक के बीच के अंतर का अहसास कराया जाना चाहिए। आपको उन्हें धर्म की शक्ति और ईमानदारी की आवश्यकता सिखानी चाहिए।
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उन्होंने शिक्षकों से पाठ्यक्रम से हटकर बच्चों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे विषयों पर भी शिक्षा देने के लिए कहा। कुछ शिक्षकों द्वारा आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान पर तैयार की गई सोशल मीडिया सामग्री का हवाला देते हुए स्टालिन ने कहा कि अन्य लोग भी छात्रों की मदद के लिए रचनात्मक समाधानों पर विचार कर सकते हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम को मुप्पेरुम विझा नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों के लिए प्रवेश स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना तथा चेंगलपेट, कल्लाकुरिची, तिरुप्पत्तूर, तिरुवल्लूर, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, कोयम्बटूर और नीलगिरी जिलों के 243 स्कूलों में नए भवनों की आधारशिला रखना था।
वहीं भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन के लिए चेन्नई के कामराजर सलाई में एक नए तमिलनाडु मुख्यालय के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई। सरकार इस पर 277 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य शुरू कर रही है। स्टालिन ने सलेम, शिवगंगा, तंजावुर, थेनी, तिरुवल्लूर, तिरुवरुर, तूतीकोरिन, अरियालुर और चेंगलपेट जिलों के 59 स्कूलों में 94 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित भवनों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में तमिल विषय में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले 142 विद्यार्थियों को 10-10 हजार रुपये के चेक भी प्रदान किए।
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स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि शिक्षकों को यह देखना चाहिए कि छात्रों में जातिवादी और लैंगिक भेदभाव की प्रवृत्ति न उभरे। सरकारी स्कूल जाने वाले छात्र गर्व का प्रतीक बन गए हैं। राज्य द्वारा संचालित स्कूलों के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सरकारी स्कूल के छात्रों को विदेशी देशों के दौरे पर ले जाया जाता है ताकि वे बाहरी दुनिया को समझ सकें और अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें।
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मुख्यमंत्री ने डीएमके सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री नाश्ता योजना और कॉलेज शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 1,000 रुपये मासिक सहायता वाली योजना का भी जिक्र किया। स्टालिन ने कहा कि छात्रों को सही, उपयुक्त विषय-वस्तु दिखाई जानी चाहिए। गूगल वेब सर्च इंजन और एआई तक पहुंच पर विचार करते हुए छात्रों को केवल ऐसे तकनीक आधारित समाधानों पर निर्भर रहकर आत्मसंतुष्टि का भाव नहीं अपनाना चाहिए। छात्रों को मानवीय विचारों और तकनीक के बीच के अंतर का अहसास कराया जाना चाहिए। आपको उन्हें धर्म की शक्ति और ईमानदारी की आवश्यकता सिखानी चाहिए।
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उन्होंने शिक्षकों से पाठ्यक्रम से हटकर बच्चों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे विषयों पर भी शिक्षा देने के लिए कहा। कुछ शिक्षकों द्वारा आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान पर तैयार की गई सोशल मीडिया सामग्री का हवाला देते हुए स्टालिन ने कहा कि अन्य लोग भी छात्रों की मदद के लिए रचनात्मक समाधानों पर विचार कर सकते हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम को मुप्पेरुम विझा नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों के लिए प्रवेश स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना तथा चेंगलपेट, कल्लाकुरिची, तिरुप्पत्तूर, तिरुवल्लूर, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, कोयम्बटूर और नीलगिरी जिलों के 243 स्कूलों में नए भवनों की आधारशिला रखना था।
वहीं भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन के लिए चेन्नई के कामराजर सलाई में एक नए तमिलनाडु मुख्यालय के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई। सरकार इस पर 277 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य शुरू कर रही है। स्टालिन ने सलेम, शिवगंगा, तंजावुर, थेनी, तिरुवल्लूर, तिरुवरुर, तूतीकोरिन, अरियालुर और चेंगलपेट जिलों के 59 स्कूलों में 94 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवनिर्मित भवनों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में तमिल विषय में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले 142 विद्यार्थियों को 10-10 हजार रुपये के चेक भी प्रदान किए।