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Gorkha Issue: 'सरकार की सलाह के बिना हुई वार्ताकार की नियुक्ति', CM ममता ने पीएम मोदी से रद्द करने की मांग की
Sat, 18 Oct 2025 03:55 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 18 Oct 2025 03:55 PM IST
सार
Gorkha Issue: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किए जाने के फैसले को आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला बताया। साथ ही इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
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ममता बनर्जी, सीएम, पश्चिम बंगाल
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए एक 'इंटरलोक्यूटर' यानी मध्यस्थ को राज्य सरकार से बिना कोई सलाह लिए ही नियुक्त कर दिया है।
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गोरखा समुदाय से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील- सीएम
सीएम ममता ने कहा कि गोरखा समुदाय से जुड़े मामले बेहद संवेदनशील हैं और इन पर फैसला राज्य सरकार की भागीदारी के बिना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, गोरखा आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक मसले सीधे तौर पर राज्य की शांति, प्रशासन और विकास से जुड़े हैं। ऐसे में बिना राज्य को शामिल किए किसी मध्यस्थ की नियुक्ति करना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।
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IPS अधिकारी पंकज कुमार सिंह नियुक्त हुए वार्ताकार
सरकार ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए वार्ताकार नियुक्त किया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इस फैसले से पहले राज्य सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया, जबकि यह मामला सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग हिल्स, तराई और दुआर्स क्षेत्रों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, 'इस तरह का एकतरफा निर्णय सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है, जो हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों में से एक है।' उन्होंने कहा कि गोरखा समुदाय से जुड़े किसी भी कदम में राज्य सरकार को शामिल करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।
सीएम ममता ने याद दिलाया जीटीए समझौता
ममता बनर्जी ने याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में त्रिपक्षीय समझौते के तहत हुआ था। यह समझौता केंद्र सरकार, राज्य सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच हुआ था। इसका उद्देश्य गोरखा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना और पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से पहाड़ी क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बना हुआ है और इसे बरकरार रखने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
यह भी पढ़ें - SC: 'हवाईअड्डों पर अधिकारियों को मौजूदा कानूनों के प्रति संवेदनशील बनाने की जरूरत', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
ममता बनर्जी की केंद्र से अपील
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा, 'इस संवेदनशील मामले में किसी भी एकतरफा कदम से क्षेत्र में शांति और सद्भाव को नुकसान पहुंच सकता है।' उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि बिना राज्य सरकार से सलाह लिए लिए गए इस फैसले को रद्द किया जाए और केंद्र-राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनाए रखी जाए।
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गोरखा समुदाय से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील- सीएम
सीएम ममता ने कहा कि गोरखा समुदाय से जुड़े मामले बेहद संवेदनशील हैं और इन पर फैसला राज्य सरकार की भागीदारी के बिना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, गोरखा आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक मसले सीधे तौर पर राज्य की शांति, प्रशासन और विकास से जुड़े हैं। ऐसे में बिना राज्य को शामिल किए किसी मध्यस्थ की नियुक्ति करना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।
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IPS अधिकारी पंकज कुमार सिंह नियुक्त हुए वार्ताकार
सरकार ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए वार्ताकार नियुक्त किया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इस फैसले से पहले राज्य सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया, जबकि यह मामला सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग हिल्स, तराई और दुआर्स क्षेत्रों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, 'इस तरह का एकतरफा निर्णय सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है, जो हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों में से एक है।' उन्होंने कहा कि गोरखा समुदाय से जुड़े किसी भी कदम में राज्य सरकार को शामिल करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।
सीएम ममता ने याद दिलाया जीटीए समझौता
ममता बनर्जी ने याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में त्रिपक्षीय समझौते के तहत हुआ था। यह समझौता केंद्र सरकार, राज्य सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच हुआ था। इसका उद्देश्य गोरखा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना और पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से पहाड़ी क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बना हुआ है और इसे बरकरार रखने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
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ममता बनर्जी की केंद्र से अपील
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा, 'इस संवेदनशील मामले में किसी भी एकतरफा कदम से क्षेत्र में शांति और सद्भाव को नुकसान पहुंच सकता है।' उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि बिना राज्य सरकार से सलाह लिए लिए गए इस फैसले को रद्द किया जाए और केंद्र-राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनाए रखी जाए।