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SC: सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार नीत NCP से मांगा 19 मार्च के बाद जारी विज्ञापनों का ब्योरा, जानें क्यों

Wed, 03 Apr 2024 02:49 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 03 Apr 2024 02:49 PM IST
सार

आदेश में ढील देने के लिए अजित पवार पक्ष द्वारा आवेदन दायर किया गया। सिंघवी ने इसका जमकर विरोध किया और कहा कि उन्होंने निर्देश का अनुपालन नहीं किया है और बिना डिस्क्लेमर के उनके द्वारा विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। 

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Clock symbol case: SC asks Ajit Pawar-led NCP to give details of ads issued following its order
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से उसके आदेश के बाद अखबारों में दिए गए विज्ञापनों का ब्योरा देने को कहा है। दरअसल, अदालत ने निर्देश दिया था कि एनसीपी अपने सभी विज्ञापनों में यह डिस्क्लेमर जरूरी देगी कि घड़ी चिह्न का उपयोग एक विचाराधीन मामला है। इसी को लेकर शरद पवार गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने आरोप लगाया कि अजित पवार गुट (जिसे अब भारत के चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक तौर पर एनसीपी के रूप में मान्यता दी गई) ने अनुपालन नहीं किया।

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आदेश की अवहेलना करने पर होगी गंभीर कार्रवाई
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने अजित पवार गुट से यह दिखाने के लिए कहा कि 19 मार्च के कोर्ट के आदेश के बाद कितने विज्ञापन प्रकाशित किए गए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गई तो गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
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हमारे आदेश का गलत अर्थ निकालने का अधिकार नहीं
पीठ ने अजित की ओर से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी से कहा, '19 मार्च को दिए गए आदेश के बाद कितने विज्ञापन जारी किए गए हैं इसका ब्योरा पेश करें। अगर वह (अजित पवार) इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं तो हमें एक राय बनाने की जरूरत पड़ सकती है। किसी को भी जानबूझकर हमारे आदेश का गलत अर्थ निकालने का अधिकार नहीं है।'
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शरद के वकील का यह कहना
शरद पवार गुट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 19 मार्च को अदालत ने तर्कसंगत आदेश पारित किया था जिसमें उन्हें (अजित पवार समूह) यह विज्ञापन जारी करने के लिए कहा गया था कि 'घड़ी' चिह्न का आवंटन इस अदालत के समक्ष विचाराधीन है और इस चिह्न का उपयोग फैसले के आधार पर होगा। भले ही 19 मार्च को विस्तृत आदेश पारित किया गया, लेकिन अजित पवार की ओर से इसका पालन नहीं किया।

इस आदेश में ढील देने के लिए दूसरे पक्ष द्वारा आवेदन दायर किया गया। सिंघवी ने इसका जमकर विरोध किया और कहा कि उन्होंने निर्देश का अनुपालन नहीं किया है और बिना डिस्क्लेमर के उनके द्वारा विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने इस अदालत के समक्ष एक आवेदन भी दायर किया है, जिसमें तर्कसंगत आदेश में ढील देने की मांग की गई है। इसे बदला नहीं जा सकता। सिंघवी ने कहा कि हम चुनाव के बीच में हैं।


न्यायालय ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार नीत पार्टी के धड़े से अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में अखबारों में यह सार्वजनिक नोटिस जारी करने को कहा कि ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटन का मुद्दा अदालत में विचाराधीन है और इस चिह्न का उपयोग फैसले के आधार पर होगा।

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