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विश्लेषण: देश में जहां पड़ता था सूखा, अब वहां बाढ़; चरम जलवायु घटनाओं का स्वरूप बदल रहा, जल चक्र पर असर

Tue, 10 Sep 2024 04:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 10 Sep 2024 04:20 AM IST
सार

आईपीई ग्लोबल और ईएसआरआई-इंडिया के ताजा विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो दशकों में गुजरात के 80 फीसदी से अधिक जिलों में भीषण बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है। शायद इसी वजह से इस साल भी सौराष्ट्र में विनाशकारी बाढ़ आई। बाढ़ से सूखे की स्थिति में पहुंचे जिलों की संख्या (149) उन जिलों की संख्या (110) से अधिक है जो सूखे से बाढ़ की स्थिति में पहुंचे हैं।
 

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Climate Change Study Extreme Weather events Drought Flash Floods Temperature Rise
जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

 भारतीय जिलों में चरम जलवायु घटनाओं का स्वरूप बदल रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र अब सूखे की चपेट में आ रहे हैं, जबकि जहां सूखा पड़ता था वहां बाढ़ की स्थिति दिखती है। इन जलवायु चरम सीमाओं की आवृत्ति, तीव्रता और अप्रत्याशितता हाल के दशकों में चार गुना बढ़ गई है।

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आईपीई ग्लोबल और ईएसआरआई-इंडिया के ताजा विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो दशकों में गुजरात के 80 फीसदी से अधिक जिलों में भीषण बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है। शायद इसी वजह से इस साल भी सौराष्ट्र में विनाशकारी बाढ़ आई। बाढ़ से सूखे की स्थिति में पहुंचे जिलों की संख्या (149) उन जिलों की संख्या (110) से अधिक है जो सूखे से बाढ़ की स्थिति में पहुंचे हैं। दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में सूखे की स्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है और पश्चिमी व मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी यही स्थिति है। जलवायु परिवर्तन के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य गैसों में वृद्धि हो रही है जो गर्मी को रोकती हैं और ग्रह को गर्म करती हैं। यह गर्मी जल चक्र को प्रभावित करती है, मौसम के पैटर्न को बदलती है और भूमि की बर्फ को पिघलाती है। ये सभी चीजें चरम मौसम को और उग्र कर रही हैं।
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0.6 डिग्री तापमान वृद्धि का परिणाम
अध्ययन के लेखक अविनाश मोहंती का कहना है कि विनाशकारी जलवायु चरम सीमाओं की वर्तमान प्रवृत्ति, जिसके कारण 10 में से 9 भारतीय चरम जलवायु घटनाओं के संपर्क में हैं, पिछली शताब्दी में 0.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि का परिणाम है। बिहार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और असम के कम से कम 60% जिले एक से अधिक चरम जलवायु घटनाओं के गवाह हैं।

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