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जलवायु परिवर्तन और गर्मी ने उड़ाई नींद: डिहाइड्रेशन के बढ़े मरीज, सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत

Sun, 24 May 2026 06:18 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 24 May 2026 06:18 AM IST
सार

भारत में गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रही, बल्कि रातें भी लगातार गर्म और उमस भरी हो रही हैं। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी और अनियोजित शहरीकरण के कारण हीटवेव पहले से ज्यादा खतरनाक बनती जा रही है। 2010 से 2024 के बीच रात के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और गरीब आबादी पर पड़ रहा है।

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Climate Change Heat Cause Sleepless Nights Surge in Dehydration Cases No Relief Even After Sunset
जलवायु परिवर्तन ने भारत की गर्मियों को बदला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में गर्मी अब केवल दोपहर की झुलसाती धूप तक सीमित नहीं रही। हालात ऐसे हो चुके हैं कि दिन में लू लोगों को झुलसा रही है, तो रात में भी तापमान और उमस शरीर को ठंडा नहीं होने दे रहे। पंखे और कूलर के बावजूद लोगों की नींद टूट रही है, जबकि अस्पतालों में हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। शहर धीरे-धीरे ऐसे हीट ट्रैप में बदलते जा रहे हैं, जहां सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती।
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क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट व्हाई इंडियाज हीटवेव्स फील मोर ब्रूटल दैन बिफोर ने चेताया है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती नमी, सूखी मिट्टी और बेतरतीब शहरीकरण मिलकर भारत की गर्मियों को पहले से कहीं ज्यादा लंबा, दमघोंटू और खतरनाक बना रहे हैं। देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में दिन और रात दोनों असामान्य रूप से गर्म बने हुए हैं।
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हर दस साल में 0.21 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा तापमान
कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज हो रहा है। इसका मतलब यह है कि सूर्यास्त के बाद भी शरीर को ठंडक नहीं मिल पा रही। क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार 2010 से 2024 के बीच भारत में रात के औसत न्यूनतम तापमान में हर दशक करीब 0.21 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 35 में रातें लगातार गर्म होती जा रही हैं।
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शरीर को ठंडक मिलना जरूरी,1961 के बाद से लगातार बढ़ रही लू की अवधि
विशेषज्ञों के मुताबिक जब रात में शरीर को ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता, तो हीट स्ट्रेस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों, बुजुर्गों, बच्चों और झुग्गी- झोपड़ियों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में भारत के कोर हीटवेव जोन को सबसे ज्यादा संवेदनशील बताया गया है। इसमें राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, बंगाल और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से शामिल हैं। 1961 के बाद से इन इलाकों में लू की अवधि और आवृत्ति दोनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
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