{"_id":"67314be2e67b7de0fd0e3b99","slug":"climate-change-existence-of-frogs-is-threatened-by-drying-water-habitats-2024-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Climate Change: सूखते जल आवासों से मेंढकों के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी एनुरान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Climate Change: सूखते जल आवासों से मेंढकों के अस्तित्व पर मंडराया खतरा, पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी एनुरान
Mon, 11 Nov 2024 05:42 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 11 Nov 2024 05:42 AM IST
सार
मेंढक और टोड शैवाल खाते हैं, जिससे फूलों का विकास नियंत्रित होता है। मेंढक पक्षियों, मछलियों और सांपों सहित कई जीवों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। मेंढकों के खत्म होने से खाद्य जाल में मूलभूत विघटन हो सकता है, जिसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा। एनुरान अच्छे जैविक मॉनीटर होते हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ग्लोबल वार्मिंग के कारण तेजी से सूख रहे जल आवासों की वजह से आने वाले सालों में मेंढक और टोड जैसे जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अध्ययन के अनुसार वर्ष 2100 तक मेंढक और टोड के मौजूदा आवासों में से 30 फीसदी तक सूख जाएंगे।
विज्ञापन
नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, एनुरान ध्रुवीय क्षेत्रों, कुछ समुद्री द्वीपों और अत्यंत शुष्क रेगिस्तानों को छोड़कर दुनिया के अधिकांश हिस्सों में पाए जाते हैं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में एनुरान विविधता सबसे अधिक है। वर्तमान में पच्चीस परिवार करीब 4,000 प्रजातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने दुनियाभर के उन क्षेत्रों का मानचित्रण करने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग किया, जहां तापमान बढ़ने के साथ और अधिक सूखे का अनुभव होने के आसार हैं। उन्होंने भीषण सूखे के प्रति पारिस्थितिकी संवेदनशीलता का भी अनुमान लगाया और कई जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों के तहत संभावित व्यवहारिक प्रभाव को दर्शाने वाले मॉडल बनाए। इस दौरान देखा गया कि सूखे के कारण ऐसा ही एक प्रमुख बदलाव उन आवासों में पानी की कमी होगी, जहां वर्तमान में एनुरान रहते हैं। ऐसे इलाकों में पानी की कमी से कुछ आवासों के आकार घट जाएंगे या गायब हो जाएंगे। ऐसे बदलाव एनुरान के लिए जीवन को और भी कठिन बना देंगे जो पहले से ही जंगलों के काटे जाने, फंगल प्रकोप, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ते तापमान के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
विज्ञापन
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जरूरी एनुरान
मेंढक और टोड शैवाल खाते हैं, जिससे फूलों का विकास नियंत्रित होता है। मेंढक पक्षियों, मछलियों और सांपों सहित कई जीवों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। मेंढकों के खत्म होने से खाद्य जाल में मूलभूत विघटन हो सकता है, जिसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा। एनुरान अच्छे जैविक मॉनीटर होते हैं। उन्हें बगीचे में पाकर बहुत कुछ सीखा जा सकता है। इनकी गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि क्षेत्र में कुछ गड़बड़ है। अगर वे खुशी-खुशी प्रजनन कर रहे हैं और क्षेत्र में रह रहे हैं तो सब कुछ ठीक ठाक है। मेंढकों की उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि खेत अथवा बगीचे में परिस्थितियां अच्छी हैं। यदि वहां रहने वाले मेंढक अचानक गायब हो जाते हैं तो यह कोई गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन