सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाई जाए तो जज काम करने के लिए तैयार : सीजेआई बोबडे
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जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने को लेकर चल रही बहस के बीच प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो जज ज्यादा लंबे समय तक काम करने को तैयार हैं। सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के सुझाव का जवाब देते हुए यह बात कही।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित 47वें प्रधान न्यायाधीश के सम्मान समारोह में वेणुगोपाल ने कहा, वकील 70-80 की वर्ष की उम्र में अदालतों में बहस कर रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति आयु 70 और हाईकोर्ट के जजों की उम्र 68 वर्ष तक की जा सकती है।
अभी सुप्रीम कोर्ट में जजों की रिटायरमेंट उम्र 65 और हाईकोर्ट में 62 साल है, जो पर्याप्त नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यह सुझाव बार एसोसिएशन के सदस्य के तौर पर दे रहे हैं।
इसके बाद बोलने आए सीजेआई बोबडे ने कहा, मैं जजों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने संबंधी अटॉर्नी जनरल के बयान पर कुछ नहीं कहूंगा। दरअसल, वह देश के सबसे बड़े विधि अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि बार के सदस्य के तौर पर बोल रहे थे। मैं भी बार के सदस्य के तौर पर ही बोल सकता हूं। आप उन्हें (अटॉर्नी जनरल) बता दें कि हम काम करने को तैयार हैं।
एआई के क्षेत्र में गंभीर अध्ययन की जरूरत
सीजेआई ने कहा यह बेहद जरूरी है कि हम न केवल न्यायपालिका बल्कि बार की स्वतंत्रता और अखंडता को भी बनाए रखें। लंबित मुकदमों और संसाधनों की कमी का जिक्र करते हुए सीजेआई बोबडे ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में हमने इस दिशा में ठोस और समन्वित प्रयास किए हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक के इस्तेमाल से न्याय प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है। सीजेआई ने कहा, कानून के क्षेत्र में आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के गंभीर अध्ययन की जरूरत है। खासतौर पर यह देखना चाहिए कि यह कैसे न्याय देने में मददगार हो सकता है। अमेरिका और नीदरलैंडस जैसे कई देश न्यायिक प्रक्रिया में मदद के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं।