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सीजेआई ने कहा: सिर्फ शिक्षित लोग ही बेहतर निर्णय लेते हैं, यह उच्चवर्गीय समझ खारिज करनी चाहिए

Sat, 03 Dec 2022 05:19 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sat, 03 Dec 2022 05:19 AM IST
सार

लक्ष्मीमल्ल सिंघवी स्मृति व्याख्यान में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, इस अर्थ में, हमारा संविधान नारीवादी दस्तावेज होने के साथ-साथ समतावादी सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी दस्तावेज भी था। यह औपनिवेशिक और पूर्व-औपनिवेशिक विरासत से एक विराम था।

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CJI said only educated people take better decisions upper class understanding should be rejected
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : twitter

विस्तार

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सिर्फ शिक्षित लोग ही बेहतर निर्णय लेते हैं, लोकतंत्र की इस उच्चवर्गीय ‘समझ’ के हर रूप को खारिज कर दिया जाना चाहिए। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की शुरुआत ऐसे समय में  एक  क्रांतिकारी अधिनियम था, जब ऐसा अधिकार केवल हाल ही में महिलाओं, खास वर्ण के व्यक्ति को दिया गया और ऐसा माना जाता है कि कामकाजी वर्ग सबसे परिपक्व है।
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लक्ष्मीमल्ल सिंघवी स्मृति व्याख्यान में शुक्रवार जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,  इस अर्थ में, हमारा संविधान नारीवादी दस्तावेज होने के साथ-साथ समतावादी सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी दस्तावेज भी था। यह औपनिवेशिक और पूर्व-औपनिवेशिक विरासत से एक विराम था। संविधान द्वारा अपनाया गया सबसे साहसिक कदम वास्तव में भारतीय कल्पना का नतीजा था। सीजेआई ने कहा, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार एक लोकतांत्रिक राज्य बनाने के लिए भारत के संस्थापक नेताओं का एक ठोस दृढ़ संकल्प था, हालांकि, नागरिकों को वोट देने के अधिकार की व्याख्या और इसे हासिल करना सरल नहीं रहा। पहली मतदाता सूची तैयार करना एक महत्वपूर्ण कार्य था, क्योंकि अधिकतर आबादी (86 प्रतिशत) निरक्षर थी और भारत का नया गणतंत्र विभाजन, युद्ध और अकाल की भयावहता से जूझ रहा था।
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प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर विचार हो
सीजेआई ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर विचार किया जाना चाहिए, जो अक्सर अपने निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने में असमर्थ होते हैं। अधिकांश प्रवासी श्रमिक अपने गृहनगर छोड़ देते हैं और उन्हें अलग-अलग शहरों, विभिन्न राज्यों और विभिन्न कोनों में पलायन करना पड़ता है।
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