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Justice U U Lalit: जस्टिस यूयू ललित होंगे नए सीजेआई, प्रधान न्यायाधीश रमण ने की सरकार से सिफारिश

Thu, 04 Aug 2022 07:43 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 04 Aug 2022 07:43 PM IST
सार

जस्टिस ललित देश के 49 वें प्रधान न्यायाधीश होंगे। सीजेआई रमण इसी माह 26 तारीख को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालांकि, उनका कार्यकाल भी तीन माह का ही रहेगा। जस्टिस यूयू ललित नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। 

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CJI Raman chooses Justice UU Lalit as his successor
जस्टिस यूयू ललित के साथ सीजेआई एनवी रमण - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण ने आज अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस यूयू ललित को चुन लिया। उन्होंने सरकार से जस्टिस ललित को नया सीजेआई नियुक्त करने की सिफारिश की है। 

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सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों के क्रम में जस्टिस रमण के बाद जस्टिस ललित का ही नाम आता है। इसलिए उन्हें ही उत्तराधिकारी चुना गया है। जस्टिस ललित देश के 49 वें प्रधान न्यायाधीश होंगे। सीजेआई रमण इसी माह 26 तारीख को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालांकि,  उनका कार्यकाल भी तीन माह का ही रहेगा। जस्टिस यूयू ललित नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। 
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न्यायमूर्ति रमण ने 24 अप्रैल 2021 को देश के 48वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपना पदभार संभाला था। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती न्यायमूर्ति एस. ए. बोबड़े की जगह ली थी। सीजेआई 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।न्यायमूर्ति ललित के अगला सीजेआई नियुक्त होने पर उनका कार्यकाल तीन महीने से भी कम का होगा, क्योंकि वह इस साल आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे।
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जस्टिस यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। तीन तलाक को असांविधानिक करार देने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के भी सदस्य थे। जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने त्रावणकोर के तत्कालीन शाही परिवार को केरल के ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन करने का अधिकार दिया था। यह सबसे अमीर मंदिरों में से एक है।

जस्टिस ललित की पीठ ने ही ‘स्किन टू स्किन टच’ पर फैसला दिया था। इस फैसले में माना गया था कि किसी बच्चे के शरीर के यौन अंगों को छूना या ‘यौन इरादे’ से शारीरिक संपर्क से जुड़ा कृत्य पॉक्सो अधिनियम की धारा-7 के तहत ‘यौन हमला’ ही माना जाएगा। पॉक्सो अधिनियम के तहत दो मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट के विवादास्पद फैसले को खारिज करते हुए जस्टिस ललित की पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट का यह मानना गलती था कि चूंकि कोई प्रत्यक्ष ‘स्किन टू स्किन’ संपर्क नहीं था इसलिए यौन अपराध नहीं है।


जस्टिस ललित उस पीठ में भी थे, जिसने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 बी (2) के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए निर्धारित छह महीने की प्रतीक्षा अवधि अनिवार्य नहीं है। हाल ही में जस्टिस ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को अदालत की अवमानना के आरोप में चार महीने के कारावास और 2000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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