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सीजेआई रमण बोले: न्यायिक बुनियादी ढांचा निगम और कोविड प्रभावित वकीलों की मदद पर केंद्र से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

Sun, 19 Dec 2021 05:56 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वरंगल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वरंगल Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 19 Dec 2021 05:56 PM IST
सार

देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने रविवार को तेलंगाना के वरंगल में अदालत परिसर का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने न्यायिक बुनियादी ढांचा निगम और ग्रामीण इलाकों में मोबाइल इंटरनेट को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाए।

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CJI NV Ramana says so far no response from Centre on Judicial Infrastructure Corporation and aid to covid affected lawyers in Warangal Telangana
देश के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

न्यायिक बुनियादी ढांचा निगम और कोविड-19 महामारी के चलते आजीविका गंवाने वाले अधिवक्ताओं को वित्तीय मदद मुहैया कराने जैसे कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने रविवार को यह बात तेलंगाना के वरंगल में कही। यहां एक अदालत परिसर का उद्घाटन करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमण ने कहा कि केंद्र की ओर से जुलाई और जून में ग्रामीण इलाकों में न्यायिक बुनियादी ढांचा निगम और मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के गठन के लिए प्रस्ताव आए थे लेकिन इन पर अभी भी कोई काम नहीं हुआ है।

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'उचित मंचों पर उठाता रहता हूं ये मुद्दे'
हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार संसद के वर्तमान शीत कालीन सत्र में न्यायिक बुनियादी ढांचा निगम के गठन के लिए एक विधेयक लेकर आएगी। सीजेआई रमण ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा, 'मैंने केंद्र सरकार से कहा था कि उन अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए जिन्होंने कोविड के चलते अपनी आजीविका खो दी है। अभी तक इस बारे में केंद्र की ओर से कोई उचित जवाब नहीं आया है। बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मैं इन मुद्दों को उन मंचों पर अक्सर उठाता रहता हूं जहां प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मौजूद होते हैं। '
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केंद्र और कानून मंत्री को लिखा था पत्र
सीजेआई ने कहा कि मैंने केंद्र सरकार और कानून मंत्री को एक पत्र लिखा था जिसमें मैंने वाहनों में मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने की मांग की थी जिससे ग्रामीण इलाकों के अधिवक्ता अदालती जिम्मेदारी में वर्चुअल रूप से हिस्सा ले सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अधिवक्ता जो नेटवर्क व इंटरनेट की पहुंच से दूर हैं वह धीरे-धीरे पेशे से बाहर हो जाएंगे।बता दें कि कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया था कि राष्ट्रीय न्यायिक बुनियादी ढांचा प्राधिकरण की स्थापना के लिए सरकार को मुख्य न्यायाधीश की ओर से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।  

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