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मौसम: गर्मी के खतरे वाले शहर ठोस के बजाय त्वरित समाधान पर दे रहे ध्यान, इन राज्यों में हालात बिगड़ने का अंदेशा
Thu, 20 Mar 2025 05:12 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 20 Mar 2025 05:12 AM IST
सार
कुछ शहर भविष्य में भीषण गर्मी की लहरों (हीटवेव) के सबसे ज्यादा खतरे में हैं। बावजूद इसके ये शहर खासतौर पर इससे निपटने के महज त्वरित समाधानों पर ध्यान दे रहे हैं। इनका ध्यान दीर्घकालिक (लंबे समय तक चलने वाले) उपायों पर बेहद कम है।
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बढ़ती गर्मी
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
भारत के कुछ शहर भविष्य में भीषण गर्मी की लहरों (हीटवेव) के सबसे ज्यादा खतरे में हैं। बावजूद इसके ये शहर खासतौर पर इससे निपटने के महज त्वरित समाधानों पर ध्यान दे रहे हैं। इनका ध्यान दीर्घकालिक (लंबे समय तक चलने वाले) उपायों पर बेहद कम है। नई दिल्ली के शोध संगठन सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव के बुधवार को प्रकाशित अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक, अगर लंबे वक्त के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में गर्मी से होने वाली मौतें और आर्थिक नुकसान बढ़ सकते हैं।
ये भी पढ़ें:- Gujarat: 'विपक्ष को चिंता जबकि जनता को राहत', गुजरात सरकार के बुलडोजर एक्शन पर बोले हर्ष संघवी
शोध में ये बातें आई सामने
शोध के तहत देश के नौ प्रमुख शहरों बंगलूरू, दिल्ली, फरीदाबाद, ग्वालियर, कोटा, लुधियाना, मेरठ, मुंबई और सूरत का विश्लेषण किया गया। ये शहर भारत की शहरी आबादी का 11 फीसदी से अधिक हिस्सा हैं। हालांकि ये शहर हीटवेव से निपटने के लिए कुछ अल्पकालिक तरीके अपना रहे हैं, लेकिन लंबे वक्त तक प्रभावी रहने वाले समाधान या तो मौजूद नहीं हैं या फिर सही तरीके से लागू नहीं किए जा रहे हैं। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ता और सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव के विजिटिंग फेलो आदित्य वालियाथन पिल्लई के कहते हैं कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में मौतों और आर्थिक नुकसान को रोकना मुश्किल हो सकता है।
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हीट एक्शन प्लान पड़ रहे कमजोर
यह रिपोर्ट गर्मी से जुड़े कामों को लागू करने के लिए जिम्मेदार शहर, जिला और राज्य सरकार के अधिकारियों के साक्षात्कार पर आधारित है। इसके मुताबिक, हीट वेव के दौरान या उससे पहले अभी भी ज्यादातर शहरों ने पीने के पानी की व्यवस्था, काम के वक्त में बदलाव और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना जैसे अस्थायी उपायों को अपनाया है, लेकिन ये उपाय मुख्य रूप से राष्ट्रीय और राज्य स्तर की आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य एजेंसियों से संचालित होते हैं न कि शहरों की ताप कार्रवाई योजनाओं यानी हीट एक्शन प्लान (एचएपी) के जरिए। एचएपी दीर्घकालिक रणनीतियों पर केंद्रित होते हैं, उनकी कमजोर कार्यान्वयन क्षमता उन्हें कम प्रभावी बना रही है।
ये भी पढ़ें:- Attacks on Tesla: US में मस्क का हिंसक विरोध, UK में भी आक्रोश; ट्रंप से नजदीकी और सरकार में दखल से भड़के लोग
अल्पकालिक समाधानों के लिए बजट का इस्तेमाल
रिपोर्ट में बताया गया कि इन शहरों में गर्मी से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की कमी है। मजदूरों के लिए ठंडी कार्यस्थल सुविधाएं, वेतन की क्षति का बीमा, अग्नि प्रबंधन और बिजली ग्रिड अपग्रेड जैसी जरूरी चीजें शहरों में मौजूद नहीं हैं। शहर अपने मौजूदा बजट का इस्तेमाल अल्पकालिक समाधान के लिए कर रहे हैं, लेकिन बड़े बदलाव, जैसे कि शहरी क्षेत्रों में ठंडक बनाए रखने और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए, विशेष वित्तीय सहायता की जरूरत है।
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हीट एक्शन प्लान पड़ रहे कमजोर
यह रिपोर्ट गर्मी से जुड़े कामों को लागू करने के लिए जिम्मेदार शहर, जिला और राज्य सरकार के अधिकारियों के साक्षात्कार पर आधारित है। इसके मुताबिक, हीट वेव के दौरान या उससे पहले अभी भी ज्यादातर शहरों ने पीने के पानी की व्यवस्था, काम के वक्त में बदलाव और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना जैसे अस्थायी उपायों को अपनाया है, लेकिन ये उपाय मुख्य रूप से राष्ट्रीय और राज्य स्तर की आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य एजेंसियों से संचालित होते हैं न कि शहरों की ताप कार्रवाई योजनाओं यानी हीट एक्शन प्लान (एचएपी) के जरिए। एचएपी दीर्घकालिक रणनीतियों पर केंद्रित होते हैं, उनकी कमजोर कार्यान्वयन क्षमता उन्हें कम प्रभावी बना रही है।
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अल्पकालिक समाधानों के लिए बजट का इस्तेमाल
रिपोर्ट में बताया गया कि इन शहरों में गर्मी से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की कमी है। मजदूरों के लिए ठंडी कार्यस्थल सुविधाएं, वेतन की क्षति का बीमा, अग्नि प्रबंधन और बिजली ग्रिड अपग्रेड जैसी जरूरी चीजें शहरों में मौजूद नहीं हैं। शहर अपने मौजूदा बजट का इस्तेमाल अल्पकालिक समाधान के लिए कर रहे हैं, लेकिन बड़े बदलाव, जैसे कि शहरी क्षेत्रों में ठंडक बनाए रखने और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए, विशेष वित्तीय सहायता की जरूरत है।
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