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भारतीय दवा कंपनी ने कोरोना की संभावित दवा के लिए गिलीड साइंसेज के साथ किया समझौता

Wed, 13 May 2020 03:42 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 13 May 2020 03:42 PM IST
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Cipla Pharma Company enters into a licensing agreement with Gilead to expand access to COVID19 treatment
सिप्ला ने कोरोना की दवा के लिए गिलीड साइंसेज के साथ किया समझौता - फोटो : Twitter

भारत की प्रमुख दवा कंपनी सिप्ला लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि उसने गिलीड साइंसेज के साथ कोविड-19 के इलाज की संभावित दवा ‘रेमेडिसविर’ के विनिर्माण और वितरण के लिए गैर-विशेष लाइसेंसिंग समझौता किया है।

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जल्द ही दो भारतीय फार्मा कंपनी भी कोरोना के इलाज में मददगार रेमडेसिविर दवा बेचेंगी। सिपला और जुबिलैंट लाइफ साइंसेज ने रेमडेसिविर बेचने के लिए अमेरिकी दवा कंपनी के साथ लाइसेंस से संबंधित समझौता किया है। इसके बाद दोनों कंपनियां भारत समेत दुनिया के 127 देशों में यह दवा बेच सकेंगी। दोनों भारतीय कंपनियां दवा का उत्पादन करने के साथ ही अपने ब्रांड का इस्तेमाल भी कर सकेंगी। 

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रेमडेसिविर दवा ने अपना क्लीनिकल ट्रायल इसी महीने पूरा किया है। अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए इस दवा को आपातकालीन उपयोग की स्वीकृति दी है। सिप्ला कंपनी ने एक बयान में कहा कि दुनिया भर में इस महामारी से पीड़ित मरीजों को जीवन-रक्षक इलाज उपलब्ध कराने के सिप्ला के प्रयासों के तहत यह समझौता किया गया है।

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समझौते के तहत सिप्ला को एपीआई (एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट) और अंतिम उत्पाद के विनिर्माण तथा भारत और दक्षिण अफ्रीका सहित 127 देशों में इसके विपणन की अनुमति मिलेगी। इन दवाओं का विपणन सिप्ला के ब्रांड नाम के तहत किया जाएगा।

रेमेडेसिविर के इस्तेमाल पर कोरोना संक्रमितों में जल्द सुधार देखने को मिला है। इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी इस दवा को संक्रमितों के इलाज में कारगर बताया है। इस दवा के इस्तेमाल से साइड इफेक्ट कम होते हैं। मौजूदा समय में भारत संक्रमितों के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कर रहा है। इस दवा के कई साइड इफेक्ट हैं। मधुमेह और ब्लड प्रेशर के मरीजों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल करने से उनमें दूसरी स्वास्थ्य समस्या पैदा होने का डर रहता है।

 

अमेरिकी दवा कंपनी गिलिड साइंसेज के मुताबिक, आम तौर पर कोरोना मरीजों में 10 दिन के इलाज के बाद सुधार देखने को मिलता है। हालांकि, रेमडेसिविर के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान पांच दिन तक इस दवा कोर्स लेने वाले रोगियों की स्थिति में सुधार पाया गया। 

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