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चित्रकूट जेल एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई या एनआईए से जांच कराने की मांग

Sun, 16 May 2021 05:52 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 16 May 2021 05:52 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर पिछले दिनों हुए उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में हुए एनकाउंटर की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से कराने की मांग की गई है। इस एनकाउंटर में तीन विचाराधीन कैदी मारे गए थे। 

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Chitrakoot jail gangwar and encounter case in supreme court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

चित्रकूट जिला जेल गैंगवार और एनकाउंटर का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अदालत से मामले की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने की मांग की गई है। वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि चित्रकूट जिला जेल में जिस तरह पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई, वह बेहद ही संदिग्ध है। याचिका में शीर्ष अदालत से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद राज्य में 18 मार्च 2017 से अब तक हुई सभी न्यायेत्तर हत्याओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) से कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलेतौर पर एनकाउंटर व गैर न्याय्यिक हत्याओं का समर्थन कर रहे है।
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याचिकाकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान रिकॉर्ड पर है कि यूपी में गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा। याचिका में बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या, विकास दुबे एनकाउंटर का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2017 के बाद सैकड़ों एनकाउंटर के मामले हुए हैं। यह बेहद चिंता की बात है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अपराधियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा देने की बजाए एनकाउंटर के जरिए जान लेकर सजा दी जा रही है।
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सैकड़ों लोगों की हत्याओं की होनी चाहिए न्यायिक जांच
पुलिस के मुताबिक बसपा विधायक मुख्तार अंसारी गिरोह के एक सदस्य समेत तीन विचाराधीन कैदियों की 14 मई को चित्रकूट जिला जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जेल के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया। याचिका में कहा गया है कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर ऐसे ही न्यायेत्तर हत्याओं की जांच नहीं की गई तो राज्य की एजेंसियां कभी भी किसी भी नागरिक की जान ले सकती हैं। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से अब तक सैकड़ों लोगों की हत्याएं होने के साथ ही सैकड़ों मुठभेड़ हुईं जो न केवल चिंताजनक हैं बल्कि परेशान करने वाली बात भी हैं।


 

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