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Chinese loan app: 'नटवरलाल' से मिलकर ‘जू फेई' ने खोली ठग कंपनियां, अवैध चीनी नागरिकों के लिए बनाया क्लब
Tue, 12 Nov 2024 06:56 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 12 Nov 2024 06:56 PM IST
सार
Chinese loan app: इन होटल और कलब में चीन के उन लोगों को विशेष तौर पर सुविधा मिलती थी, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते थे। कुछ ऐसे भी थे, जिनका वीजा खत्म हो चुका था और वे लंबे समय से दिल्ली और उसके आसपास रह रहे थे।
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चीनी लोन एप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चीन का एक नागरिक 'जू फेई' दिल्ली आता है। कुछ दिनों तक इधर उधर घूमता रहा। पता लगाया कि दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर अवैध गतिविधियां शुरु की जा सकती हैं। पुलिस कितनी चुस्त है या सुस्त, यह भी पता लगा लिया। ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए उसने सबसे पहले मोहाली में रवि नटवरलाल ठक्कर को पकड़ा। उसे ठगी के तरीके समझा दिए। 'लकिन' क्लब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स 'तियानशांग' रेनजियन प्राइवेट लिमिटेड, नाम से दो होटल व क्लब खोल दिए।
खास बात यह रही है कि इन होटल और कलब में चीन के उन लोगों को विशेष तौर पर सुविधा मिलती थी, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते थे। कुछ ऐसे भी थे, जिनका वीजा खत्म हो चुका था और वे लंबे समय से दिल्ली और उसके आसपास रह रहे थे। इन लोगों ने चाइनिज लोन एप बनाया। लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे भारी वसूली की। इतना ही नहीं, कम उम्र की लड़कियों द्वारा शुरु वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियां भी प्रारंभ कर दी। होटल व कलब में ये गतिविधियां संचालित होती थी। ईडी ने इस मामले का भंडाफोड़ कर 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इलाहाबाद सब जोनल कार्यालय ने अनंतिम रूप से उक्त संपत्ति कुर्क की हैं। यह कार्रवाई, जू फेई चीनी नागरिक और चीनी ऋण ऐप मामले से संबंधित अन्य लोगों के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। कुर्क संपत्ति में 3.12 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस/फिक्स्ड डिपॉजिट आदि भी शामिल हैं। इसमें पंजाब के एसएएस नगर मोहाली में स्थित 60 लाख रुपये की एक अचल संपत्ति (आवासीय फ्लैट) भी है। इसका स्वामित्व रवि नटवरलाल ठक्कर, जो जू फेई का करीबी सहयोगी है, के पास है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीसी 1860, विदेशी अधिनियम, 1946 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत किए गए अपराधों के लिए विशेष कार्य बल, उत्तर प्रदेश पुलिस, गौतम बुद्ध नगर द्वारा दायर एफआईआर और उसके बाद के आरोप पत्रों के आधार पर जांच शुरू की थी।
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ईडी की जांच से पता चला कि जू फी, एक चीनी नागरिक, अवैध रूप से भारत में रह रहा था। उसने रवि नटवरलाल ठक्कर और अन्य के साथ मिलकर मेसर्स लकिन क्लब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स तियानशांग रेनजियन प्राइवेट लिमिटेड नामक दो होटल और क्लब शुरु किए। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में स्थित होटल और कलब, विशेष रूप से चीनी नागरिकों के लिए, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते थे और रहते थे, उन्हें यहां पर सुविधाएं मिलती थी। इन होटलों में जू फेई और उसके कार्टेल द्वारा जुआ और कम उम्र की लड़कियों द्वारा वेश्यावृत्ति जैसी विभिन्न अवैध गतिविधियां/सेवाएं शुरु की गई थी।
उन्होंने कठपुतली/डमी निदेशकों वाली कई कागजी/फर्जी कंपनियां खोली थीं। वे ऐसी ही कंपनियों की छत्रछाया में रुपया प्लस, लकी वॉलेट, फ्लैश पैसा, पैसा करो, हाय पैसा, राधा मनी आदि जैसे विभिन्न तत्काल ऋण ऐप संचालित कर रहे थे। जो लोग इनके चंगुल में फंसते थे, वे उनसे भारी ब्याज दर वसूल रहे थे। ईएमआई के भुगतान में देरी के मामले में उधारकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच प्राप्त कर लेते थे। ऋण वसूली की आड़ में उन्हें ब्लैकमेल और धमकी देते थे। उन्होंने यह खेल, विभिन्न राज्यों में शुरु कर दिया। लोगों और उधारकर्ताओं को धोखा देकर उनसे करोड़ों रुपये की बड़ी राशि एकत्र की। भोले भाले एवं मजबूर लोगों को चीनी कार्टेल द्वारा नियंत्रित फर्जी/कागज/शेल कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर लेनदेन के जाल में फंसा दिया। वे लोग, ई-कचरे के अवैध व्यापार और उससे पीसीबी/मोबाइल चिप/मदर बोर्ड आदि के निष्कर्षण में भी शामिल थे। ईडी ने इससे पहले जून में 13.51 करोड़ रुपए कुर्क किए थे।
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खास बात यह रही है कि इन होटल और कलब में चीन के उन लोगों को विशेष तौर पर सुविधा मिलती थी, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते थे। कुछ ऐसे भी थे, जिनका वीजा खत्म हो चुका था और वे लंबे समय से दिल्ली और उसके आसपास रह रहे थे। इन लोगों ने चाइनिज लोन एप बनाया। लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे भारी वसूली की। इतना ही नहीं, कम उम्र की लड़कियों द्वारा शुरु वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियां भी प्रारंभ कर दी। होटल व कलब में ये गतिविधियां संचालित होती थी। ईडी ने इस मामले का भंडाफोड़ कर 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इलाहाबाद सब जोनल कार्यालय ने अनंतिम रूप से उक्त संपत्ति कुर्क की हैं। यह कार्रवाई, जू फेई चीनी नागरिक और चीनी ऋण ऐप मामले से संबंधित अन्य लोगों के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। कुर्क संपत्ति में 3.12 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस/फिक्स्ड डिपॉजिट आदि भी शामिल हैं। इसमें पंजाब के एसएएस नगर मोहाली में स्थित 60 लाख रुपये की एक अचल संपत्ति (आवासीय फ्लैट) भी है। इसका स्वामित्व रवि नटवरलाल ठक्कर, जो जू फेई का करीबी सहयोगी है, के पास है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीसी 1860, विदेशी अधिनियम, 1946 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत किए गए अपराधों के लिए विशेष कार्य बल, उत्तर प्रदेश पुलिस, गौतम बुद्ध नगर द्वारा दायर एफआईआर और उसके बाद के आरोप पत्रों के आधार पर जांच शुरू की थी।
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ईडी की जांच से पता चला कि जू फी, एक चीनी नागरिक, अवैध रूप से भारत में रह रहा था। उसने रवि नटवरलाल ठक्कर और अन्य के साथ मिलकर मेसर्स लकिन क्लब प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स तियानशांग रेनजियन प्राइवेट लिमिटेड नामक दो होटल और क्लब शुरु किए। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में स्थित होटल और कलब, विशेष रूप से चीनी नागरिकों के लिए, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते थे और रहते थे, उन्हें यहां पर सुविधाएं मिलती थी। इन होटलों में जू फेई और उसके कार्टेल द्वारा जुआ और कम उम्र की लड़कियों द्वारा वेश्यावृत्ति जैसी विभिन्न अवैध गतिविधियां/सेवाएं शुरु की गई थी।
उन्होंने कठपुतली/डमी निदेशकों वाली कई कागजी/फर्जी कंपनियां खोली थीं। वे ऐसी ही कंपनियों की छत्रछाया में रुपया प्लस, लकी वॉलेट, फ्लैश पैसा, पैसा करो, हाय पैसा, राधा मनी आदि जैसे विभिन्न तत्काल ऋण ऐप संचालित कर रहे थे। जो लोग इनके चंगुल में फंसते थे, वे उनसे भारी ब्याज दर वसूल रहे थे। ईएमआई के भुगतान में देरी के मामले में उधारकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच प्राप्त कर लेते थे। ऋण वसूली की आड़ में उन्हें ब्लैकमेल और धमकी देते थे। उन्होंने यह खेल, विभिन्न राज्यों में शुरु कर दिया। लोगों और उधारकर्ताओं को धोखा देकर उनसे करोड़ों रुपये की बड़ी राशि एकत्र की। भोले भाले एवं मजबूर लोगों को चीनी कार्टेल द्वारा नियंत्रित फर्जी/कागज/शेल कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर लेनदेन के जाल में फंसा दिया। वे लोग, ई-कचरे के अवैध व्यापार और उससे पीसीबी/मोबाइल चिप/मदर बोर्ड आदि के निष्कर्षण में भी शामिल थे। ईडी ने इससे पहले जून में 13.51 करोड़ रुपए कुर्क किए थे।