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चीन की खुराफात से आई आफत, लद्दाख में भारत से उलझे ड्रैगन को अमेरिकी जहाजों ने समुद्र में घेरा

Sat, 27 Jun 2020 12:11 AM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Sat, 27 Jun 2020 12:11 AM IST
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China the common link between Ladakh and 3 US super carriers in the Indo Pacific
US navy warship - फोटो : ANI

चीन अब अपनी आक्रमकता को लेकर संकट में फंसता हुआ दिख रहा है। भारत के साथ लद्दाख के पहाड़ों पर उलझे चीन ने अब प्रशांत महासागर में अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया। क्योंकि अमेरिकी नौसेना के तीन जहाजों ने अब सागर में भी ड्रैगन की चुनौती को बढ़ा दिया है। शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी एशिया में बढ़ाई जा रही है।

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बीजिंग में बैठकर खुराफाती योजना बनाने वाले अब एक पल लद्दाख के बारे में सोचते हैं तो दूसरे ही पल उनके दिमाग में अमेरिकी जहाज तैरने लगते हैं। प्रशांत महासागर में इससे पहले तीन अमेरिकी जहाज तीन साल पहले उतरे थे, जब नॉर्थ कोरिया से विवाद बढ़ा था। हालांकि, अमेरिकी नौसेना के जहाजों की तैनाती भारत-चीन सीमा पर तनाव की वजह से ही नहीं हुई है, लेकिन यह चीन के बड़े रणनीतिक के जोड़-घटाव का हिस्सा जरूर बन गया है। 

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चीन और पाकिस्तान को दो मोर्चे खुलने से रोक सकता है

नेशनल सिक्यॉरिटी एडवाइजरी में हाल ही में कार्यकाल पूरा करने वाले नौसेना एक्सपर्ट वाइस-एडमिरल अनिल चोपड़ा ने कहा कि नौसेना के मूवमेंट से चीजें आगे बढ़ती हैं। जब आप टकराव वाले इलाकों में उन्हें ले जाते हैं तो यह एक संदेश भेजता है। चीन को इस बात की चिंता होगी कि ये क्या कर सकते हैं ना कि वास्तव में ये क्या करेंगे। एक अमेरिका जहाज प्रशांत तट से दूर है, जबकि दूसरा फिलीपींस के पास है और तीसरा थियोडोरे रूजवेल्ट वियतनाम की ओर बढ़ रहा है।

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पेंटागन के एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्यॉरिटी स्टडीज के प्रफेसर मोहन मलिक कहते हैं, 'इस लोकेशन का मतलब है कि युद्ध की स्थिति में इन जहाजों को मलक्का जलडमरूमध्य और बंगाल की खाड़ी में तैनात किया जा सकता है।

यूएसएस रूजवेल्ट एक सुपर कैरियर है, जो कि भारत और चीन के जहाजों से तीन गुना ज्यादा बड़ा है। इसके युद्ध समूह में क्रूजर, विध्वंसक स्क्वैड्रन और पनडुब्बी शामिल होते हैं। मलिक कहते हैं, पूर्वी हिंद महासागर में विमानवाहक पोतों को भेजकर अमेरिका भारत के खिलाफ चीन और पाकिस्तान को दो मोर्चे खुलने से रोक सकता है।


मलिक कहते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच कोल्ड वॉर में भारत एक अग्रिम देश है। भारत के साथ सीमा पर चीन का सैन्य दबाव साफ तौर पर भारत की बढ़ती ताकत की वजह से है। बीजिंग भारत में शांत वातावरण को खराब करना चाहता है, जो भारत के आर्थिक विकास के लिए जरूरी है और इससे चीन के साथ पॉवर के अंतर में कमी आएगी।

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