जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच इस सप्ताहांत होने वाली वार्ता के एजेंडे में रूस-यूक्रेन संघर्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता मुख्य विषय होंगे। जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने बुधवार को यह जानकारी दी।
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भारत-जर्मनी
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'ओलाफ के दो दिवसीय दौरे में इन विषयों पर रहेगा जोर'
राजदूत एकरमैन ने कहा कि जर्मनी ने यूक्रेन में युद्ध को तत्काल खत्म करने और वहां स्थायी शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के एक प्रस्ताव के समर्थन के लिए भारत से संपर्क किया है। ओलाफ शोल्ज की दो दिवसीय यात्रा शनिवार को शुरू होगी। इस दौरान उनका जोर व्यापार, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ उर्जा (क्लीन एनर्जी) और कुशल जनशक्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। जर्मन चांसलर इसके अलावा वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
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यूक्रेन में जारी जंग के दौरान तबाही का एक मंजर।
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'मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति मुश्किल, भारत प्रभावशाली भागीदार'
उन्होंने कहा, जर्मन चांसलर शोल्ज और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मुलाकात में हम रूस-यूक्रेन युद्ध को एजेंडे में बहुत ऊपर देख रहे हैं। यह एजेंडे का अहम हिस्सा होगा। एकरमैन ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति को बहुत मुश्किल बताया और कहा कि जर्मनी इन मुद्दों पर विचार करने में भारत को बहुत प्रभावशाली और महत्वपूर्ण भागीदार मानता है। राजदूत ने कहा, हम यूक्रेन को अपने क्षेत्र की रक्षा की रक्षा के लिए मदद करना जारी रखेंगे। रूस पश्चिम की एकता और रणनीतिक धैर्य से हैरान है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा
- फोटो : ट्विटर/संयुक्त राष्ट्र
यदि भारत यूएनजीए में यूक्रेन का समर्थन नहीं करता तो..
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान राजदूत से जब सवाल किया गया कि क्या हिंद प्रशांत सहित अन्य क्षेत्रों में चीन के आक्रामक व्यवहार का मुद्दा भी वार्ता में शामिल होगा, जवाब में उन्होंने कहा, यह विषय भी एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा। यह पूछे जाने पर कि भारत अगर यूक्रेन पर यूएनजीए के आगामी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करता है तो क्या यह कदम जर्मनी के लिए निराशाजनक होगा, राजदूत ने कहा, इस संबंध में फैसला भारत को करना है। वोटिंग में भाग लेने या उससे दूरे रहना किसी भी देश का संप्रभु फैसला है। हमने भारतीय पक्ष से संपर्क किया है। हम नहीं जानते कि उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी।
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कच्चा तेल
- फोटो : पिक्साबे
संकट का हल ढूंढने में भारत की भूमिका देखना चाहता है जर्मनी
रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल की खरीद के भारत के फैसले पर एकरमैन ने कहा कि जर्मनी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मंगलवार के देश के नाम संबोधन का हवाला देते हुए कहा कि जर्मनी इस संकट का समाधान ढूंढने में भारत की भूमिका देखना चाहता है, लेकिन इस स्तर पर नहीं।