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एप बैन हुए चीन को याद आ गए द्विपक्षीय रिश्ते, बहिष्कार से घबराया ड्रैगन

Wed, 08 Jul 2020 08:24 AM IST
अवधेश कुमार जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली  Published by: अवधेश कुमार Updated Wed, 08 Jul 2020 08:24 AM IST
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China remembers bilateral relationship after 59 apps ban in india
भारत-चीन कारोबार - फोटो : Amar Ujala
भारत हर साल चीन से 74 अरब डॉलर का आयात करता है। लद्दाख की गलवां घाटी में जब चीन अपनी हरकत से बाज नहीं आया तो सबसे पहली चोट 'आयात' पर की गई। इससे पहले चीन के 59 एप जो भारतीय बाजार में धमाल मचाए हुए थे, उन पर बैन लगा दिया। देखते-देखते बैन का यह सिलसिला केंद्रीय मंत्रालयों से होते हुए छोटी दुकानों तक जा पहुंचा। भाजपा शासित कई राज्यों ने भी चीन के प्रोजेक्ट पर बैन लगाने की घोषणा कर दी।
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चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा 5 जुलाई जारी बयान में बैन का असर साफ दिख रहा था। वांग ने कहा, दोनों पक्ष अपने द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान दें। एक दूसरे के लिए खतरा पैदा करने की बजाय विकास के अवसर प्रदान करें। भारत, चीन के साथ काम करेगा, इस मुद्दे पर जनमत का सही दिशा में मार्गदर्शन करे। उनका यह इशारा 'बैन और बहिष्कार' को लेकर था।
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वांग यी ने कहा कि यह वर्ष चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। दोनों देशों ने कड़ी मेहनत से प्रगति की है।

नहीं संभला तो होगा बड़ा आर्थिक नुकसान

जब चीन के 59 एप पर बैन लगाया गया तो उसके बाद विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों ने भी चीनी उपकरणों से दूरी बनाने की बात कही। विभिन्न देशों में स्थित भारतीय मिशनों से संपर्क कर निर्यात की संभावनाएं तलाशी जाने लगी। इन दूतावासों को 15 सौ भारतीय उत्पादों की सूची भेजी गई है। इनमें कृषि रसायन, मसाले, कपड़ा व चमड़े से बनी वस्तुएं शामिल हैं।

निर्यात संवर्द्धन परिषद ने दूतावासों के जरिए करीब डेढ़ दर्जन देशों से संपर्क साधा है। केंद्र सरकार ने उन उत्पादों का गहराई से अध्ययन किया है जो मौजूदा समय में चीन से आते हैं। चीन से आने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) की सीमा तय करने पर गंभीरता से विचार होने लगा। एफपीआई निवेशक की सूचीबद्ध शेयर में 10 प्रतिशत तक निवेश करने की सीमा को 5 प्रतिशत करने की कवायद शुरू हो गई। इसका ड्राफ्ट डीईए और सेबी द्वारा तैयार किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिक्योरिटी क्लीयरेंस और बीआईएस की गुणवत्ता से संबंधित जांच रिपोर्ट के लिए नई सख्त नियमों वाली एसओपी बनाई जाने लगी।

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