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Hindi News ›   India News ›   China Map Galvan clash 26 patrolling points 19 rounds of military talks Arunachal claim What is the truth

China: गलवां झड़प, 26 पेट्रोलिंग पॉइंट छीनना, सैन्य वार्ता के 19 दौर और अरुणाचल पर दावा; कौन जानता है सच्चाई?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 30 Aug 2023 03:25 PM IST
सार

गत जनवरी में दिल्ली में आयोजित डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में एक विस्तृत सिक्योरिटी रिसर्च पेपर में भारत के क्षेत्र पर चीन के अवैध कब्जे जैसी स्थिति सामने आई थी। उस पेपर में कई तरह के खुलासे हुए थे।

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China Map Galvan clash 26 patrolling points 19 rounds of military talks Arunachal claim What is the truth
भारत-चीन सीमा विवाद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अब उसने एक नक्शा जारी कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस नक्शे में चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा किया है। साथ ही अक्साई चिन को भी अपना इलाका बताया है। लद्दाख में 2020 के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों मुल्कों के सैन्य कमांडरों के बीच बैठकों के 19 दौर पूरे हो चुके हैं। संसद के मानसून सत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे थे। इनमें चीन बॉर्डर पर 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से भारत का अधिकार छिनना, और 'बफर' जोन भी हमारी जमीन में तैयार होना शामिल है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि पूरा लद्दाख जानता है कि चीन ने अतिक्रमण किया है। यह मानचित्र मुद्दा बहुत गंभीर है, उन्होंने हमारी जमीन छीन ली है। इस मामले में विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि इस नक्शे का कोई मतलब नहीं है। चीन को ऐसे नक्शे जारी करने की आदत है। 

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चार दिन बाद ही चीन ने धृष्टता कर दी
चीन द्वारा नक्शा जारी करने के बाद कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अपने ट्वीट में लिखा, साउथ अफ्रीका में प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग मिले थे। हालांकि चीन की तरफ से ऐसा बयान जारी किया गया था कि यह बैठक पीएम मोदी के आग्रह पर हुई है। भारतीय मीडिया में इस बैठक को लेकर कहा गया कि पीएम मोदी ने 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (एलएसी) पर घुसपैठ को लेकर सख्त लहजे में बात की है। बतौर श्रीनेत, इस बैठक के महज चार दिन के बाद ही चीन ने धृष्टता कर दी। एक नक्शा जारी कर चीन ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना इलाका बता दिया। ये कैसी सख्ती है इस देश के प्रधानमंत्री की, जिससे चीन अपनी वाहियात हरकतों से बाज नहीं आ रहा। चीन की हिम्मत कैसे हो रही है कि वह हमारी भूभागीय अखंडता के साथ खिलवाड़ कर रहा है। कांग्रेस नेता ने लिखा, चीन के साथ पीएम मोदी का प्रेम देश को महंगा साबित हो रहा है। साबरमती के तट पर झूले की पींगें, महाबल्लीपुरम में शहनाई, चीन के साथ 20 से ऊपर मुलाकातें, इन सबके बावजूद चीन यह हिमाकत कर रहा है। 
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पूरा लद्दाख जानता है, चीन ने अतिक्रमण किया है
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, जो हाल ही में कई दिन की लद्दाख यात्रा के बाद दिल्ली लौटे हैं, उन्होंने कहा, चीन द्वारा अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश पर दावा करने वाला नक्शा जारी करने के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी को बयान देना चाहिए। बता दें कि चीन ने सोमवार को एक नया 'मानक' नक्शा जारी किया है। चीन ने अक्साई चिन, जिस पर उसने 1962 के युद्ध में कब्जा किया था, उसे अपना हिस्सा बताया है। इतना ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश, जिस पर वह दक्षिण तिब्बत के रूप में दावा करता है, चीन ने उसे भी नक्शे में अपना क्षेत्र बताया है। राहुल गांधी ने कर्नाटक के लिए रवाना होते समय कहा, प्रधानमंत्री को इस बारे में कुछ कहना चाहिए। मैं वर्षों से कह रहा हूं कि पीएम लद्दाख को लेकर जो बात कहते हैं कि वहां पर एक इंच जमीन नहीं गई है, वह झूठ है। पूरा लद्दाख जानता है कि चीन ने अतिक्रमण किया है। यह मानचित्र मुद्दा बहुत गंभीर है। 
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दावा करने से कोई क्षेत्र आपका नहीं हो जाता
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन ने उन क्षेत्रों के मानचित्र जारी किए हैं, जो उनके नहीं हैं। चीन की यह पुरानी आदत है। भारत के कुछ हिस्सों के साथ मानचित्र जारी करना, इससे कुछ भी नहीं बदलेगा। हमारी सरकार इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि हमें अपनी जगह पर क्या करना है। अगर कोई देश यह बेतुका दावा करता है तो उससे हमारा क्षेत्र, उनका नहीं हो जाता। इससे पहले भारत ने 'मानक' मानचित्र पर राजनयिक माध्यम से भी अपना विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने अपने बयान में कहा, 'हम इन दावों को खारिज करते हैं, क्योंकि उनका कोई आधार नहीं है। चीनी पक्ष के ऐसे कदम केवल सीमा प्रश्न के समाधान को जटिल बनाते हैं। चीन ने इससे पहले अप्रैल में अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के लिए नए चीनी नामों की घोषणा की थी। 

ब्रिक्स में हुई अनौपचारिक एवं संक्षिप्त वार्ता
15वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 24 अगस्त को एक अनौपचारिक एवं संक्षिप्त वार्ता हुई थी। सरकार के सूत्रों ने बताया था कि दोनों देशों के बीच 'लद्दाख' बॉर्डर पर जारी तनाव कम करने के लिए पीएम मोदी और जिनपिंग ने बातचीत की है। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (एलएसी) पर 2020 से तनाव चल रहा है। दोनों मुल्कों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीमा विवाद का हल निकालने के लिए 19 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक मामले का समाधान नहीं हो सका। चीन के राष्ट्रपति अगले माह जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। उस दौरान भी मोदी और जिनपिंग के बीच अनौपचारिक बातचीत हो सकती है। देखने वाली बात यह होगी कि इन वार्ताओं के बीच क्या लद्दाख में भारत को 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से खोया अधिकार वापस मिल जाएगा। 

लोकसभा में भी उठ चुका है पेट्रोलिंग पॉइंट्स का मुद्दा
पिछले दिनों लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान यह मुद्दा उठा था। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे थे। उन्होंने पूछा, क्या चीन बॉर्डर पर 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से हमने अपना अधिकार खो दिया है। क्या 'बफर' जोन भी भारत की जमीन में बने हैं। भारत और चीन के बीच मिलिट्री टॉक्स के 18 राउंड पूरे होने के बाद क्या नतीजा निकला है। हमारे बहादुर जवान, चीन का मुकाबला कर रहे हैं। दूसरी तरफ चीन के साथ भारत का व्यापार बढ़ता जा रहा है। तिवारी ने पूछा, क्या आक्रमण करने के पैसे हम चीन को दे रहे हैं। 


सिक्योरिटी रिसर्च पेपर में हुआ था खुलासा
गत जनवरी में दिल्ली में आयोजित डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन में एक विस्तृत सिक्योरिटी रिसर्च पेपर में भारत के क्षेत्र पर चीन के अवैध कब्जे जैसी स्थिति सामने आई थी। उस पेपर में कई तरह के खुलासे हुए थे। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में उसी सम्मेलन का हवाला देते हुए पूछा था कि भारत ने 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स (पीपी) में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर क्या अपना अधिकार खो दिया है। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि मई 2020 से पहले भारत सभी 65 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर पेट्रोलिंग करता था। 

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