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दावा: स्थानीय मीडिया के जरिए दूसरे देशों की छवि खराब करने में लगा चीन; भारत में न्यूजक्लिक को बनाया जरिया
Tue, 08 Aug 2023 05:09 AM IST
शिव शरण शुक्ला
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 08 Aug 2023 05:09 AM IST
सार
इसके साथ ही भारत के न्यूजक्लिक पोर्टल का नाम उन संस्थानों में शामिल हो गया है, जिन्हें सिंघम ने चीनी दुष्प्रचार के लिए भुगतान किया है। दिलचस्प बात यह है कि न्यूजक्लिक और सिंघम दोनों ही लंबे समय से भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में हैं।
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चीन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है किस तरह से चीन दुनियाभर में मीडिया आउटलेट को पैसे देकर अपनी छवि चमकाने और दूसरे देशों के खिलाफ दुष्प्रचार को अंजाम दे रहा है। चीन के इस एजेंडा को चलाने में श्रीलंकाई मूल का अमेरिकी कारोबारी नेविल रॉय सिंघम किंगपिंग के तौर पर सामने आया है।
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इसके साथ ही भारत के न्यूजक्लिक पोर्टल का नाम उन संस्थानों में शामिल हो गया है, जिन्हें सिंघम ने चीनी दुष्प्रचार के लिए भुगतान किया है। दिलचस्प बात यह है कि न्यूजक्लिक और सिंघम दोनों ही लंबे समय से भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, कम ही लोग जानते हैं कि नेविल रॉय सिंघम चीन की सरकार का काम कर रहा है। गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में चीन अपने दुष्प्रचार को दुनियाभर में फैलाने के लिए रॉय को फंडिंग कर रहा है। रॉय दान के रूप में इस पैसे को भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों में कथित प्रगतिशील लोगों और संगठनों को दे रहा है, जो प्रगतिशीलता की वकालत के बहाने चीनी सरकार के इशारे पर लोगों को भड़काने और भ्रमित करने में जुटे हैं।
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नेविल रॉय सिंघम ने बांटे 2,275 करोड़
1954 में जन्मा 69 वर्षीय नेविल राय सिंघम खुद को कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता बताता है। वह थॉटवर्क नाम की आईटी कंपनी का फाउंडर और चेयरमैन है। नेविल ने अमेरिका सहित दुनियाभर के कई देशों में गैर सरकारी संगठनों को एक साल में 27.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 2,275 करोड़ रुपये बांटे हैं। नेविल का दुष्प्रचार तंत्र कई मीडिया हाउस तक फैला है।
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न्यूजक्लिक को मिले 38 करोड़ रुपये
नेविल ने भारत में चीनी दुष्प्रचार और एजेंडा चलाने के लिए न्यूजक्लिक को जरिया बनाया। न्यूजक्लिक को नेविल की कंपनियों व उसके समर्थन वाले दूसरे स्रोतों से करीब 38 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 20 करोड़ रुपये निर्यात भुगतान के रूप में मिले हैं, जबकि 10 करोड़ रुपये एफडीआई के तौर पर मिले। इसके अलावा 1.5 करोड़ रुपये दफ्तर के मेंटेनेंस के तौर पर मिले। इसके अलावा शेष रकम सीधे तौर पर न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को मिली।
न्यूजक्लिक में 86 करोड़ की संदिग्ध विदेशी फंडिंग की जांच कर रहा ईडी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) न्यूजक्लिक पोर्टल चलाने वाली कंपनी को 86 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी धनराशि मिलने की जांच कर रहा है, जिसका संबंध अमेरिकी अरबपति नेविल रॉय सिंघम से है। ईडी की तरफ मनी लॉन्ड्रिंग विरोदी कानून के तहत जांच किए जा रहे मामले में जल्द ही आरोपपत्र दाखिल किए जाने की उम्मीद है। न्यूज पोर्टल और इसके एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ समेत उसके प्रमोटरों के ठिकानों पर ईडी ने सितंबर 2021 में छापा मारा था।
ईडी की जांच के अनुसार, 2021 में जब एजेंसी ने कंपनी के ठिकानों की जांच पड़ताल को तो उसने दावा किया है कि उसे विदेश में सेवा के बदले मार्च 2018 तक जस्टिस एंड एजुकेशन फंड इंक, अमेरिका, द ट्राइकॉन्टिनेंटल लि. अमेरिका, जीएसपीएएन एलएलसी अमेरिका और सेंट्रो पॉपुलर डी मिडास, ब्राजील से क्रमश: 76.84 करोड़ रुपये, 1.61 करोड़ रुपये, 26.98 लाख रुपये और 2.03 लाख रुपये प्राप्त हुए। लेकिन एजेंसी ने कहा कि छापे के दौरान उसे न्यूज पोर्टल की तरफ से इन कंपनियों को सेवा प्रदान करने के संबंध में कोई सबूत नहीं मिले।