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भारत की बढ़ी चिंता, चीन ने दिल्ली से मात्र 1350 किमी दूरी पर बनाया बम प्रूफ बंकर

Wed, 03 Oct 2018 01:56 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 03 Oct 2018 01:56 PM IST
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china made bunkers just 1350 km away from delhi indian government raised has big concern
भारत चीन

भारत के लिए उसके पड़ोसी देश चीन हो या फिर पाकिस्तान हमेशा से ही चिंता का विषय रहा है। चीन ने एक बार प्रधानमंत्री ऑफिस की नींद उड़ा कर रख दी है। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीआरए) में चीन की तरफ से ल्हासा के गोंगर एयरपोर्ट पर चीन ने अपने सैनिकों के लिए अंडरग्राउंड बम प्रूफ शेल्टर बनाया है। जिसने भारत के पशीने पर चिंता की लकीरें उकेर दी है। इस पूरे मामले से वाकिफ आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है।

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बता दें कि गोंगर एयरपोर्ट की दूरी नई दिल्ली से महज 1,350 किलोमीटर है। देश की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है पहले इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल क्षेत्रीय संपर्कों को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन, अब इसे पूरी तरह से सैन्य छावनी के रूप में बदला जा रहा है।
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गोंगर एयरपोर्ट को चीन ने बनाई सैन्य छावनी

वैसे तो चीन भारत की सीमा से सटे अपने क्षेत्रों में हर दिन नई तकनीक का उपयोग कर विकास की नई कहानी गढ़ता रहा है। चीनी सैनिक की अकसर ही भारतीय सीमा में प्रवेश करने की खबरे आती रहती हैं लेकिन नया मामला भारत के लिए सचमुच चिंता का विषय बन गया है। सूत्रों ने बताया कि 'टैक्सी ट्रैक' नीति के तहत चीन ने हवाई पट्टी से शुरुआत कर इसे पूरी तरह छावनी में बदल दिया है। और यहां फिलहाल तीन स्क्वैड्रोन यानी 36 लड़ाकू विमानों को रखे जाने की योजना बनाई है। 
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हाल के दिनों में भले ही भारत और चीन के बीच आपसी रिश्तों में गर्माहट देखने को मिली है। प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी एक अनौपचारिक सम्मेलन के दौरान वुहान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक की। जिसके बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया था। 

दोकलम विवाद के समय आमने-सामने आए भारत-चीन
राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री की मुलाकात भले ही दोकलम विवाद के बाद हुई हो लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दोनों देशों के बीच एक वक्त ऐसा आ गया था जब युद्ध होने की संभावना बढ़ गई थी। 

 
युद्ध के समय बम प्रूफ हैंगर्स की पड़ती है जरूरत

सुरक्षा अधिकारी ने चीन द्वारा बनाए गए बम प्रूफ हैंगर्स के बारे में बताया कि लड़ाकू विमानों के लिए बम प्रूफ हैंगर्स की जरूरत तभी पड़ती है जब युद्ध की स्थिति बन पड़ी हो। क्योंकि युद्ध की स्थिति में लड़ाकू विमानों को खुले में रखना एक जोखिम भरा निर्णय हो सकता है। ऐसे में लड़ाकू विमानों को बम प्रूफ शेल्टर में रखना  होता है। वैसे चीन ने यह सुविधा रूस से लगती सीमा के पास पहले से ही बना रखा है लेकिन तिब्बत क्षेत्र  में जिस तरह से चीन ने अंडरग्राउंड बम प्रूफ शेल्टर का निर्माण किया है यह भारत तो चिंता में डालने के लिए काफी है।

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