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सीडीएस रावत बोले: भारत की सुरक्षा के लिए चीन सबसे बड़ा खतरा, लेकिन हम किसी भी दुस्साहस से निपटने को तैयार
Fri, 12 Nov 2021 06:36 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 12 Nov 2021 06:36 PM IST
सार
एक कॉन्क्लेव में जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत सीमा पर और समुद्र में किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए तैयार है।
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (File photo)
- फोटो : ANI
विस्तार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने चीन को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भेजे गए हजारों सैनिकों और हथियारों की वापसी लंबे समय तक नहीं हो पाएगी।
सैनिकों को वापस बुलाए जाने पर सहमति नहीं
एक मीडिया कॉन्क्लेव में जनरल रावत ने गुरुवार को कहा कि परमाणु शक्ति संपन्न दो पड़ोसियों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों में विश्वास की कमी और संदेह बाधा बनी हुई है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत गतिरोध के साथ खत्म हुई, क्योंकि दोनों देश इस बात पर सहमत नहीं हुए कि सीमा से कैसे सैनिकों को वापस बुलाया जाना है।
किसी भी दुस्साहस का जवाब देने को तैयार
पिछले साल से ही एलएसी पर तनाव के बीच दोनों देश सीमा पर सैनिकों के साथ हथियार भी बढ़ाने में जुटे हुए हैं। जनरल रावत ने कहा कि भारत सीमा पर और समुद्र में किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए तैयार है। चीनी (एलएसी के पास) गांव बसा रहे हैं और भविष्य में इनका इस्तेमाल फौजियों के ठिकाने के रूप में हो सकता है। दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद चीन ने यह कदम उठाया है।
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सीडीएस रावत ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के भारत पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जाहिर की और कहा कि जम्मू-कश्मीर में इसके जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश हो सकती है। जनरल रावत ने कहा कि शत्रुतापूर्ण रवैया रखने वाले चीन और तालिबान के साथ पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों ने भारतीय सेना के लिए उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के साथ थिएटर कमांड पुनर्गठित करना जरूरी बना दिया है।
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सैनिकों को वापस बुलाए जाने पर सहमति नहीं
एक मीडिया कॉन्क्लेव में जनरल रावत ने गुरुवार को कहा कि परमाणु शक्ति संपन्न दो पड़ोसियों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों में विश्वास की कमी और संदेह बाधा बनी हुई है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की बातचीत गतिरोध के साथ खत्म हुई, क्योंकि दोनों देश इस बात पर सहमत नहीं हुए कि सीमा से कैसे सैनिकों को वापस बुलाया जाना है।
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किसी भी दुस्साहस का जवाब देने को तैयार
पिछले साल से ही एलएसी पर तनाव के बीच दोनों देश सीमा पर सैनिकों के साथ हथियार भी बढ़ाने में जुटे हुए हैं। जनरल रावत ने कहा कि भारत सीमा पर और समुद्र में किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए तैयार है। चीनी (एलएसी के पास) गांव बसा रहे हैं और भविष्य में इनका इस्तेमाल फौजियों के ठिकाने के रूप में हो सकता है। दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद चीन ने यह कदम उठाया है।
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सीडीएस रावत ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के भारत पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जाहिर की और कहा कि जम्मू-कश्मीर में इसके जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश हो सकती है। जनरल रावत ने कहा कि शत्रुतापूर्ण रवैया रखने वाले चीन और तालिबान के साथ पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों ने भारतीय सेना के लिए उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के साथ थिएटर कमांड पुनर्गठित करना जरूरी बना दिया है।