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Hindi News ›   India News ›   China in support of Pakistan regarding 'G20' tourism working group meeting

G20: चीन की मोलभाव वाली दोस्ती में फंसा पाक, J&K को विवादित कह कर स्वयंभू 'खलीफा' को कश्मीर आने से रोका

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 20 May 2023 07:58 PM IST
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सार
जम्मू-कश्मीर में होने वाली 'जी20' टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक से किनारा कर चीन और तुर्की ने भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने का प्रयास किया है। हालांकि ये कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वैश्विक मंचों पर चीन ने पाकिस्तान की तरफदारी की है। वहां के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की यूएन की प्रक्रिया में रोड़ा अटकाया है।
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China in support of Pakistan regarding 'G20' tourism working group meeting
चीन-पाकिस्तान

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर से चीन, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हो गया है। इसे दूसरे शब्दों में यूं भी कह सकते हैं कि 'ड्रैगन' की मोलभाव वाली दोस्ती में पाकिस्तान बुरी तरह फंस चुका है। इसके बावजूद पाकिस्तान को लगता है कि चीन ही उसका सच्चा साथी है। चीन ने पाकिस्तान के बोल बोलते हुए जम्मू-कश्मीर में 22 से 24 मई तक होने वाली 'जी20' टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक में भाग लेने से मना कर दिया है। चीन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर विवादित क्षेत्र है। इतना ही नहीं, इस्लामिक राष्ट्रों का स्वयंभू 'खलीफा' तुर्की ने भी कश्मीर आने से कदम पीछे खींच लिए हैं। भारत और पड़ोसी मुल्कों के संबंधों पर नजर रखने वाले सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, ये एक सोची समझी चाल है। बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका पाकिस्तान एक नए समूह में अपने हित तलाश रहा है। इस समूह में चीन और पाकिस्तान के अलावा तुर्की और अफगानिस्तान भी शामिल हैं। 



पाकिस्तान की तरफदारी करना चीन की मजबूरी ...  
जम्मू-कश्मीर में होने वाली 'जी20' टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक से किनारा कर चीन और तुर्की ने भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने का प्रयास किया है। हालांकि ये कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वैश्विक मंचों पर चीन ने पाकिस्तान की तरफदारी की है। वहां के आतंकियों को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की यूएन की प्रक्रिया में रोड़ा अटकाया है। अब उसी चीन ने कहा है कि वह एक 'विवादित' इलाके में ऐसी किसी भी बैठक के आयोजन की 'मजबूती से' खिलाफत करता है। कैप्टन गौर बताते हैं कि चीन तो शुरु से ही एक व्यापारी रहा है। वह बिना पैसे के फायदे के किसी की मदद नहीं करता। पाकिस्तान में चीन ने भारी निवेश कर दिया है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफदारी करना उसकी मजबूरी बन गया है। अब पाकिस्तान ने चीन के अलावा तुर्की और अफगानिस्तान को भी साथ मिला लिया है। तुर्की लंबे समय से प्रयास कर रहा है कि वह दुनिया के मुस्लिम राष्ट्रों का नेतृत्व करे। अफगानिस्तान से जब नाटो सेनाएं वापस लौट रही थी तो पाकिस्तान के आईएसआई चीफ काबुल पहुंच गए थे। 


तीनों ही देशों की क्या पॉलिसी है, सब जानते हैं ...  
बता दें कि मई के पहले सप्ताह में इस्लामाबाद में पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की यह पांचवीं त्रिपक्षीय वार्ता थी। इसमें पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी, कार्यवाहक अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी और चीनी विदेश मंत्री किन गैंग शामिल रहे। इस बैठक का प्रयोजन आर्थिक सहयोग करना और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, आदि विषयों पर चर्चा बताया गया। हालांकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि आतंकवाद को लेकर तीनों ही देशों की क्या पॉलिसी है। पाकिस्तान की मंशा है कि इस नापाक गठजोड़ में तुर्की को भी औपचारिक तौर पर शामिल कर लिया जाए। तुर्की की यात्रा पर गए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति इर्दोगन से आग्रह किया था कि वे चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी), का हिस्सा बनना चाहें तो वे मध्यस्थता कर सकते हैं। पाकिस्तान के बाद चीन ने अब अफगानिस्तान में भी सीपीईसी योजना को आगे बढ़ाने की बात कही है। भारत इस परियोजना का विरोध करता रहा है, क्योंकि ये प्रोजेक्ट गुलाम कश्मीर से होकर गुजरता है। 

इस स्वार्थ के चलते पाक को मदद दे रहा चीन … 
कैप्टन अनिल गौर के अनुसार, ये चारों देश अब एक दूसरे के साथ खड़े हैं। सबसे बड़ा स्वार्थ चीन का है। उसे अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को हर हाल में पूरा करना है। सीपीईसी, उसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कॉरिडोर के इंट्रस्ट के चलते चीन, पाकिस्तान को भरपूर मदद दे रहा है। उसने पाकिस्तान में अपने पोर्ट तक बना लिए हैं। ऐसी स्थिति में चीन नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को भारत के चलते कोई नुकसान हो। अगर पीओके की स्थिति में कोई बदलाव होता है तो उसका असर चीन पर पड़ेगा। ड्रैगन इस बात को भली भांति समझता है कि इस बदलाव से उसके रोड प्रोजेक्ट और पोर्ट पर बुरा असर पड़ सकता है। 

कश्मीर के लोगों को कर रहे हैं फोन … 
पाकिस्तान नहीं चाहता है कि कश्मीर में जी20 की बैठक हो, इसलिए उसने चीन और तुर्की को इससे दूर करा दिया। पाकिस्तान के गुर्गे एवं आतंकी संगठन, कश्मीर के लोगों को फोन कर रहे हैं कि वे बैठक स्थल पर न जाएं। किसी भी समारोह में भाग न लें। इससे पहले 170 आईकॉन यूथ कश्मीर आए थे। उन्होंने यहां की स्थिति को देखा। वे यहां से खुश होकर गए। उनकी रिपोर्ट बताती है कि कश्मीर और लद्दाख में तो सब अच्छा है। यहां पर पाकिस्तान का दुष्प्रचार फेल हो गया। दूसरी ओर पाकिस्तान में सेना और सरकार के खिलाफ पीओके में प्रदर्शन हो रहे हैं। वहां के लोग कह रहे हैं कि वे हिंदुस्तान में रहते तो ज्यादा बेहतर होते। गिलगित-बल्तिस्तान में भी यही स्थिति है। 

चीन को अपने प्रोजेक्ट तो इन्हें चाहिए पैसा ... 
कैप्टन गौर बताते हैं कि चीन को अपने प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान व अफगानिस्तान को पैसा चाहिए। चीन के पास तकनीक है। वह इसके जरिए अफगानिस्तान में माइनिंग कर सकता है। अफगानिस्तान में तालिबान हुकूमत को मालूम है कि मिनरल को केवल चीन ही निकाल पाएगा। ऐसे में वह लैंड लॉक्ड वाली स्थिति में ही रहेगा। इसके चलते चीन अपने प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त स्पेस की मांग भी करेगा। भारत को इस गठजोड़ पर नजर रखनी होगी। विदेश नीति में बदलान लाना होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का यह कहना कि भारत सीपीईसी के तीसरे देश में विस्तार के खिलाफ है। ये प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करता है, केवल इतना बयान काफी नहीं है।अंतरराष्ट्रीय मंच से इस बाबत आवाज उठानी होगी। भारत को सामरिक और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर चीन को टक्कर देने के लिए ठोस रणनीति तैयार करनी पड़ेगी। अगर 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना पूरी होती है तो दुनिया में चीन का प्रभाव बढ़ जाएगा। चीन की यह परियोजना दुनिया के लगभग 62 देशों को सड़क, रेल और समुद्री मार्ग से जोड़ देगी।

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