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गंगा में 4200 करोड़ की परियोजना को चीन ने वर्ल्ड बैंक को दी मंजूरी

Sun, 31 Jul 2016 06:42 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 31 Jul 2016 06:42 AM IST
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China granted permission to World Bank to 4,200 crore for Ganga project
- फोटो : Reuters

गंगा में 4200 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित जल परिवहन परियोजना पर चीन ने अपनी अनापत्ति दे दी है। वर्ल्ड बैंक की ओर से इसके लिए चीन के वित्त मंत्रालय को पत्र भेजा था। चीन के इंटरनेशनल फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन डिवीजन 1 के निदेशक यंग युआनजिए ने वर्ल्ड बैंक के कंट्री डायरेक्टर को संबोधित पत्र लिखकर योजना पर किसी प्रकार की आपत्ति न होने की बात कही है।

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जल परिवहन परियोजना के लिए विश्व बैंक ने बांग्लादेश और नेपाल से भी एनओसी मांगी है। गंगा में इलाहाबाद से हल्दिया तक 1620 किलोमीटर जलमार्ग विकसित किया जा रहा है। इस योजना की फंडिंग वर्ल्ड बैंक रहा है। वाराणसी सहित चार स्थानों पर मल्टी मॉडल टर्मिनल बनाए जा रहे हैं।
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दरअसल, वर्ल्ड बैंक जब किसी परियोजना से जुड़ता है तो परियोजना से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से जुड़े सभी देशों से एनओसी ली जाती है। आईडब्ल्यूएआई के प्रवक्ता बृजेश के मुताबिक चीन से एनओसी लेने के पीछे कारण यह है कि तिब्बत के कई जलस्रोतों से गंगोत्री को जलापूर्ति होती है।

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​लेकिन वन विभाग ने नहीं दी एनओसी

China granted permission to World Bank to 4,200 crore for Ganga project
विश्व बैंक ने मांगी थी अनुमति - फोटो : Getty

एनओसी के लिए वर्ल्ड बैंक की ओर से 16 जून को चीन की फाइनेंस मिनिस्ट्री को पत्र लिखा गया। 27 जुलाई को चीन की तरफ से किसी प्रकार की आपत्ति न होने संबंधी पत्र विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ओन्नो रूहल को प्राप्त हुआ।

भारत और चीन में सीमा विवाद सहित कई अन्य मसलों पर गतिरोध के बावजूद गंगा में जल परिवहन के मसले पर उसकी तो अनापत्ति मिल गई लेकिन वन विभाग से कछुआ सेंक्चुअरी के लिए एनओसी लेना इनलैंड वाटरवेज अथारिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) के लिए टेढ़ी खीर बन गया है।

आईडब्ल्यूएआई के आवेदन और एक्सपर्ट कमेटी की एनओसी पर सहमति के बावजूद इस बारे में अब तक कोई निर्णय सामने नहीं आ पाया है। आईडब्ल्यूएआई के दो मालवाहक जहाज पखवारे भर से लंगर डाले हुए हैं। उनके लिए वन टाइम परमीशन देने में भी वन विभाग हीलाहवाली कर रहा है जबकि क्रूज राजमहल को इसके पहले कई बार वन टाइम परमीशन वन विभाग ने ही दिया था।

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