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भारत से रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को उत्सुक चीन
Mon, 16 Dec 2019 02:54 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 16 Dec 2019 02:54 AM IST
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चीन और भारतीय सैनिक
- फोटो : PTI
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चीन ने भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में उत्सुकता जताई है। चीन के राजदूत सुन वाइदोंग के अनुसार क्षेत्रीय शांति व स्थायित्व के लिए दोनों देशों में सभी तरह के सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में वीडोंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दूसरे दौर की अनौपचारिक वार्ता के सकारात्मक परिणाम अब नजर आने लगे हैं।
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उन्होंने दावा किया कि भारत और चीन के बीच करीब साढ़े तीन हजार किमी लंबी सीमा पर पिछले कुछ महीनों से ज्यादा समन्वय हो रहा है। वहीं चीनी विदेश मंत्री वांग यी इसी महीने भारत आकर सीमा से जुड़ी वार्ता करेंगे। वे मामल्लपुरम की वार्ता में लिए गए निर्णयों के अनुपालन का पुनर्निरीक्षण करेंगे।
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आरसेप पर भारत के निर्णय का सम्मान करते हैं : चीन
वीडोंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय आर्थिक व व्यापारिक वार्ता भी जारी है। यह द्विपक्षीय कारोबार व निवेश को तेजी देगा। वीडोंग ने कहा कि चीन भारत द्वारा क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसेप) पर भारत के निर्णय को समझता और उसका सम्मान करता है।
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भारत ने पिछले महीने अपनी चिंताएं जताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया था। वीडोंग के अनुसार चीन इससे जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी हित धारकों के साथ काम करने को इच्छुक है। उन्होंने कहा कि एक-एक अरब आबादी वाले दो बड़े विकासशील मुल्कों के द्विपक्षीय संबंध वैश्विक महत्व रखते हैं।
कश्मीर पर पुराना राग : एकतरफा कदम उठाने से बचने को कहा
उन्होंने कश्मीर मामले पर पुरानी बातें दोहराते हुए चीन की स्थिति को सुसंगत और स्पष्ट बताया और कहा कि सभी पक्षों को शांति से वार्ता के जरिए मुद्दों को सुलझाना चाहिए। किसी तरह के एकतरफा कदम से बचना चाहिए, इससे चीजें उलझती हैं।
सीमा विवाद पर वीडोंग ने कहा कि 2005 में तय किए गए बिंदुओं पर चीन के विशेष प्रतिनिधि भारत के साथ वार्ता करेंगे और दोनों को स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। बता दें कि दोनों पक्ष पहले ही 20 राउंड की वार्ता कर चुके हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत बताते हुए इस पर दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न अंग घोषित करता है।