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China: चीन ने तवांग में LAC के 150 मीटर के दायरे में सड़क का किया निर्माण, एएसपीआई अध्ययन में दावा

Wed, 21 Dec 2022 05:01 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 21 Dec 2022 05:01 AM IST
सार

रणनीतिक रूप से बेहद अहम तवांग इलाके में भारतीय सेना को मात देने के लिए पिछले एक साल में चीन ने नए सैन्य और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बना लिए हैं। जिससे वह बहुत तेजी से अपने सैनिकों को अब इस इलाके में जब चाहे भेज सकता है। इसी बीच चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 150 मीटर के दायरे तक पहुंच गई है।

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China constructed a sealed road leading to within 150m of LAC
चीन ने नई सड़क का किया निर्माण। - फोटो : Twitter

विस्तार

चीन और भारतीय सैनिकों के बीच अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में झड़प के 10 दिन से ज्यादा बीत गए हैं। लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसा के बाद यह अब तक की सबसे हिंसक झड़प हुई है। ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञों ने सैटलाइट तस्वीरों के आधार पर खुलासा किया है कि तवांग जिले के यांगत्से पठारी इलाके में भारत ने चीन के ऊपर अपनी रणनीतिक बढ़त बनाई हुई है।

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एलएसी के 150 मीटर के दायरे तक पहुंचा चीन
रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस इलाके में भारतीय सेना को मात देने के लिए पिछले एक साल में चीन ने नए सैन्य और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बना लिए हैं जिससे वह बहुत तेजी से अपने सैनिकों को अब इस इलाके में जब चाहे भेज सकता है। इसी बीच चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 150 मीटर के दायरे तक पहुंच गई है। चीन ने एलएसी के 150 मीटर के दायरे में एक सड़क का निर्माण किया है। तवांग सेक्टर में चीन का तेजी से बुनियादी ढांचा विकास चीन को वहां अतिरिक्त सैनिकों को तेजी से तैनात करने की अनुमति देता है। ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) के एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
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उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण पर आधारित है अध्ययन
यह अध्ययन नौ दिसंबर को यांग्त्से में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच शारीरिक संघर्ष के बाद किया गया है। अध्ययन इस क्षेत्र में एलएसी के साथ लगते प्रमुख क्षेत्रों के उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण पर आधारित है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने दोकलाम से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक इतने बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी की है जिससे दोनों देशों के बीच कभी भी संघर्ष छिड़ सकता है। यह जानबूझकर भी हो सकता है। एएसपीआई ने कहा कि तवांग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। चीन भूटान की सीमा में जो घुसपैठ कर रहा है, उसे भारत आसानी से तवांग से निगरानी कर सकता है।
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 यांगत्से पठार रणनीतिक रूप से दोनों ही देशों के लिए अहम
अध्ययन में कहा गया है कि यांगत्से पठार रणनीतिक रूप से दोनों ही देशों के लिए अहम है। यह समुद्र से 5,700 मीटर की ऊंचाई पर है। इससे पूरे इलाके पर नजर रखना आसान है। इस पर भारत का कब्जा है जिससे वह सेला दर्रे को चीन से बचाए रखने में सक्षम है। सेला दर्रा ही तवांग को जोड़ने का एकमात्र रास्ता है। भारत यांग्त्से पठार की ऊंची जमीन पर कमांडिंग पोजिशन पर नियंत्रण रखे हुए है। इसलिए चीन ने नए सैन्य और परिवहन बुनियादी ढांचे का निर्माण करके इस नुकसान की भरपाई की है, ताकी इसके जरिये वह इस क्षेत्र में सैनिकों को जल्दी से ला सके।

चीन ने कई प्रमुख पहुंच वाली कच्ची सड़कों को अपग्रेड किया
अध्ययन में कहा गया है कि चीन ने कई प्रमुख पहुंच वाली कच्ची सड़कों को अपग्रेड किया है और तांगवु न्यू विलेज से एलएसी रिज-लाइन के 150 मीटर के भीतर एक 'सील' सड़क का निर्माण किया है। वर्तमान में इस सड़क के अंत में एक छोटा पीएलए शिविर भी है। नौ दिसंबर की झड़प के दौरान चीनी सैनिकों को भारतीय चौकियों की ओर बढ़ने में इस नई सड़क ने ही सक्षम बनाया था। बता दें कि पूर्वी लद्दाख में गलवां और पैंगोंग त्सो में सैनिकों की वापसी और पुनर्तैनाती ने चीन के साथ संघर्ष के जोखिम को कम कर दिया है, लेकिन इसके विपरीत संघर्ष की प्रवृत्ति अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से पठार पर हो रही है। अध्ययन में कहा गया है, सीमा चौकियों की तैयारी का परीक्षण करने और यांग्त्से में यथास्थिति को खत्म करने के लिए चीनी सैनिकों के हाल ही में उकसाने वाले कदमों ने एक खतरनाक मिसाल कायम की है।

एलएसी से मात्र 150 मीटर की दूरी पर चीन ने बसाया गांव
भारत सेला दर्रे के पास एक सुरंग बना रहा है जो अगले साल (2023) तक बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद भी यांगत्से पठार से तवांग जाने वाले हर वाहन की निगरानी हो सकेगी। भारतीय सेना यहां ऊंचाई वाले इलाके में मौजूद जरूर है, लेकिन जंग के समय में उसकी सप्लाइ लाइन को आसानी से काटा जा सकता है। यहां बनी सड़क भी टूट रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन यांगत्से पठारे में निचले इलाके में है, लेकिन उसने भारत की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे में निवेश किया है। चीन ने कई सड़कों की मरम्मत की है और उन्हें अपने नए बसाए हुए गांव से जोड़ दिया है। यह चीनी गांव एलएसी से मात्र 150 मीटर की दूरी पर है।

चीन ने सीमा से 150 किमी दूर तैनात किए ड्रोन-फाइटर जेट्स
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारतीय सेना के साथ झड़प में मात खाए चीन ने पूर्वोत्तर सीमा से 150 किमी दूर ड्रोन व फाइटर जेट तैनात किए हैं। मैक्सार टेक्नोलॉजी की सैटेलाइट इमेज में चीन की गतिविधियां साफ देखी जा सकती हैं।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने बांगदा एयरबेस पर सोरिंग ड्रैगन ड्रोन तैनात किया है। यह ड्रोन सैटेलाइट इमेज में दिखाई दे रहा है। बांगदा एयरबेस अरुणाचल सीमा से महज 150 किमी दूर है। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने भी पिछले बृहस्पतिवार और शुक्रवार को युद्धाभ्यास किया था। इससे पहले 11 दिसंबर को अमेरिकी रक्षा वेबसाइट वॉर जोन ने सैटेलाइट इमेज जारी की थी, जिसमें तिब्बत के शिगात्से पीस एयरपोर्ट पर चीन के 10 एयरक्राफ्ट और 7 ड्रोन दिखे थे। तिब्बत में न्यिंगची, शीगत्से और नागरी में चीन के 5 एयरपोर्ट हैं और ये भारत-नेपाल बॉर्डर के करीब हैं। ब्यूरो
 

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