फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   children of women suffering from domestic violence higher risk of mental health problems in India

चिंताजनक: घरेलू हिंसा की शिकार माताओं के बच्चों पर मानसिक रोगी होने का खतरा, भारत में हर तीसरी महिला शिकार

Sat, 31 May 2025 06:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 31 May 2025 06:15 AM IST
सार

अध्ययन में भारत के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 2,800 किशोर और उनकी माताओं को शामिल किया गया। इस दौरान 12–17 साल के किशोरों और उनकी माताओं के शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण के अनुभवों को देख कर यह पता लगाया गया कि इसका किशोरों की मानसिक सेहत पर क्या असर होता है।

विज्ञापन
children of women suffering from domestic violence higher risk of mental health problems in India
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी

विस्तार

भारत में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के बच्चों को मानसिक सेहत से जुड़ी परेशानियों का शिकार होने की आशंका प्रबल होती है। ऐसे किशोर व बच्चे चिंता और अवसाद सहित मानसिक सेहत से जुड़े विकार से अधिक जूझते हैं। यह खुलासा शोध पत्रिका प्लॉस वन में प्रकाशित अध्ययन में हुआ है।

विज्ञापन


यह अध्ययन देश के स्कूलों में मानसिक आघात ( ट्रॉमा) को समझने वाले कार्यक्रम के साथ ही घरेलू हिंसा की रोकथाम की सख्त जरूरत की तरफ इशारा करता है। अध्ययन सीवीईडीए कंसोर्टियम, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बंगलूरू और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने किया। शोध अध्ययन में भारत के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 2,800 किशोर और उनकी माताओं को शामिल किया गया। इस दौरान 12–17 साल के किशोरों और उनकी माताओं के शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण के अनुभवों को देख कर यह पता लगाया गया कि इसका किशोरों की मानसिक सेहत पर क्या असर होता है। इस आधार पर शोध के लेखकों ने बताया कि घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के किशोरों में अवसादग्रस्तता (डिप्रेशन) और चिंता जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा ज्यादा था। डिप्रेशन ऐसे बच्चों में देखा गया जिनकी मांओं को शारीरिक, मानसिक और यौन तीनों प्रकार का शोषण झेलना पड़ा। वहीं, बच्चों में चिंता की प्रवृत्ति मां के शारीरिक और यौन शोषण से जुड़ी थी।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Defence Ministry: लड़ाकू विमान- तेजस MK1A के लिए HAL को सौंपी गई 'सेंट्रल फ्यूजलेज असेंबली'; स्वदेशी को बढ़ावा
विज्ञापन
विज्ञापन


मां के साथ हिंसा को गर्भ में ही महसूस करते हैं बच्चे
मां के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार अक्सर बच्चे कम उम्र में ही देख, समझ और महसूस कर लेते हैं। इससे उन्हें मानसिक चोट पहुंचती है और जो मानसिक सेहत पर गहरे तक असर डालती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मां के साथ घरेलू हिंसा के गवाह रहे बच्चे पढ़ाई और व्यवहार में बदलाव साफ दिखाई देता है। किशोरावस्था में सोच, व्यवहार और व्यक्तित्व का विकास होता है। इस दौर में मां के साथ होती हिंसा देखना बच्चों के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। इससे उनके अंदर लंबी बीमारियां, मनोवैज्ञानिक और मानसिक रोग विकसित हो सकते हैं।  


संयुक्त परिवार की भूमिका
शोधकर्ताओं के मुताबिक, भारत में संयुक्त परिवार (जहां महिला अपने पति और उसके परिवार के साथ रहती है) अक्सर यह हिंसा को सीधा या परोक्ष रूप से बढ़ावा देता है। इसमें पति पर दबाव डालना या महिला को चुप कराना शामिल है।

ये भी पढ़ें: Congress: 'ये किसी एक व्यक्ति की नहीं, पूरे देश की उपलब्धि', आतंकवाद पर PM मोदी के बयान पर बोलीं रेणुका चौधरी

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं
भारत में हर तीसरी महिला घरेलू हिंसा की शिकार होती है। इससे उनमें डिप्रेशन, चिंता, आघात के बाद तनाव विकार (पीटीएसडी) के साथ ही आत्महत्या के विचार आने की आशंका बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पश्चिमी देशों में हुए अध्ययनों में यह संबंध अच्छी तरह से बताया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि घरेलू हिंसा का संबंध गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म, समय से पहले डिलीवरी के साथ ही ऐसे मांओं की बच्चों में भावनात्मक, व्यवहारिक और पढ़ाई में दिक्कतों से जुड़ा है। बावजूद इसके भारत में अब भी मां के साथ हो रही हिंसा से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रभावित होने वाली बात पर कम तवज्जो है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed