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अध्ययन: गर्भावस्था में वसा-शर्करायुक्त भोजन शिशु के लिए नुकसानदेह, वयस्क होने पर इन रोगों का रहता है खतरा

Sat, 21 Sep 2024 05:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 21 Sep 2024 05:01 AM IST
सार

जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने बताया कि मां का मोटापा भ्रूण के हृदय में थायरॉयड हार्मोन को बदल देता है, जिससे उसका विकास रुक जाता है।

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Children born to obese pregnant women more likely to have heart problems and diabetes as adults
गर्भवती महिला (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

मोटापे से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों में वयस्क होने पर हृदय संबंधी समस्याएं और मधुमेह जैसे रोग होने के आसार अधिक होते हैं, क्योंकि उनकी मां के अधिक वसा और ऊर्जायुक्त भोजन के कारण भ्रूण को नुकसान पहुंचता है। जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में इसका खुलासा किया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि मां का मोटापा भ्रूण के हृदय में थायरॉयड हार्मोन को बदल देता है, जिससे उसका विकास रुक जाता है।

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गर्भावस्था के दौरान अधिक वसा व शर्करायुक्त भोजन करने से अजन्मे बच्चे के वयस्क होने पर इनमें इंसुलिन की कमी होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे मधुमेह और हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं। ऐसा तब भी संभव है जब जन्म के समय बच्चे का वजन सामान्य होता है। शोधकर्ताओं ने उच्च ऊर्जा वाला आहार खिलाए गए गर्भवती बबून के भ्रूणों के ऊतक के नमूनों का विश्लेषण करके इस संबंध की पहचान की। फिर उन्होंने इसकी तुलना नियंत्रित आहार दिए गए बबून के भ्रूणों से की। इससे पता चला कि  बहुत अधिक वसा और चीनी से भरपूर अस्वास्थ्यकर भोजन तथा हृदय की समस्या के बीच स्पष्ट संबंध प्रदर्शित करते हैं। अधिक वसा वाले आहार भ्रूण के हृदय में हाइपर या हाइपोथायरायड की स्थिति उत्पन्न करते हैं। साक्ष्यों से पता चलता है कि ऐसा जीवन में आगे चलकर भी हो सकता है।
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वसा और चीनी से भरपूर आहार इंसुलिन सिग्नलिंग में शामिल आणविक मार्गों और भ्रूण के हृदय में ग्लूकोज के अवशोषण में शामिल महत्वपूर्ण प्रोटीन को बदल सकता है। इससे हृदय संबंधी इंसुलिन प्रतिरोध का खतरा बढ़ जाता है, जो अक्सर वयस्क होने पर मधुमेह का कारण बनता है। बच्चे अपने हृदय की सभी कोशिकाओं के साथ पैदा होते हैं। जन्म के बाद हृदय किसी भी तरह के नुकसान की मरम्मत के लिए पर्याप्त नई हृदय मांसपेशी कोशिकाएं नहीं बनाता है।
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नहीं संभले तो आने वाले दशकों में जीवन अवधि कम होगी
शोधकर्ता अपने निष्कर्ष में कहते हैं कि अगर बहुत अधिक वसा वाले मीठे भोजन की बढ़ती दरों पर गौर नहीं दिया गया तो अधिक लोगों में मधुमेह और हृदय रोग जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जन्म लेंगी। इस वजह से आने वाले दशकों में जीवन अवधि कम हो सकती है।

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