Child Sex Ratio: 'प्रसवपूर्व लिंग चयन के लिए हो सकता है आधुनिक तकनीकों का गलत इस्तेमाल', मंडाविया ने किया आगाह
Child Sex Ratio: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रसवपूर्व लिंग चयन के लिए आधुनिक तकनीकों के संभावित दुरुपयोग के बारे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह लिंग असंतुलन को बढ़ा सकते हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रसवपूर्व लिंग चयन के लिए आधुनिक तकनीकों के संभावित दुरुपयोग के बारे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह लिंग असंतुलन को बढ़ा सकते हैं। मंडाविया ने 18 अक्तूबर को केंद्रीय पर्यवेक्षी बोर्ड (सीएसबी) की 29वीं बैठक में यह टिप्पणी की। उन्होंने लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ लैंगिक भेदभाव के मुद्दे को संबोधित करने के लिए देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।
बैठक में देश में घटते बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) और जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) पर चर्चा की गई। सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने लैंगिक समानता की दिशा में देश की यात्रा को लेकर भी आशा जताई। मंडाविया ने 2020 की नवीनतम नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण (एसआरएस) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, 'आंकड़ों से पता चलता है कि जन्म के समय लिंगानुपात में सराहनीय तीन अंकों का सुधार हुआ है, जो 2017-19 में 904 से बढ़कर 2018-20 में 907 हो गया।'
मंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्वेक्षण में शामिल 22 राज्यों में से 12 ने सुधार दिखाया है, जो गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (विनियमन और दुरुपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1994 (पीसी और पीएनडीटी अधिनियम) और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना को लागू करने में राज्यों के संयुक्त प्रयासों को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि ताजा एसआरएस रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि 2015 में पांच अंकों के अंतर की तुलना में 2020 में लिंग अंतर में दो अंकों की कमी देखी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दस राज्यों ने लिंग अंतर को प्रभावी ढंग से उलट दिया है, जिससे महिला जीवित रहने की दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
मंडाविया ने आईवीएफ प्रक्रियाओं, नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्ट (एनआईपीटी) और कॉम्पैक्ट डायग्नोस्टिक उपकरण जैसी आधुनिक तकनीकों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की, जो परिवार के संतुलन के बहाने लिंग चयन की सुविधा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा, इन प्रौद्योगिकियों का उनके सकारात्मक चिकित्सा अनुप्रयोगों के बावजूद दुरुपयोग किया जा सकता है और लिंग असंतुलन को बढ़ाया जा सकता है। पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत केंद्र सरकार पर लिंग निर्धारण और चयन के लिए चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग का मुकाबला करने की जिम्मेदारी है। मंडाविया ने आग्रह किया कि इस अधिनियम का इस्तेमाल किसी के द्वारा निर्दोष डॉक्टरों को परेशान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
देशभर में बनाए गए 26 करोड़ आयुष्मान कार्ड: स्वास्थ्य मंत्रालय
केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत देश भर में 26 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानताकी देते हुए कहा कि यह मील का पत्थर है।
चार करोड़ कार्डों के साथ, उत्तर प्रदेश सबसे अधिक संख्या वाले राज्यों की सूची में शीर्ष पर है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्रमशः 3.69 करोड़ और 2.04 करोड़ आयुष्मान कार्डों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान में आगे कहा कि 49 फीसदी आयुष्मान कार्ड महिला लाभार्थियों के पास हैं।
बयान में कहा गया है कि एबी पीएम-जेएवाई ने 70,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 5.7 करोड़ अस्पताल प्रवेशों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा कार्यान्वित की जा रही प्रमुख योजना 12 करोड़ लाभार्थी परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये प्रति परिवार का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है।