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Child Rightsl Panel: NCPCR ने राज्यों को लिखी चिट्ठी, मदरसों को मिलने वाली फंडिंग बंद करने की अपील की

Sat, 12 Oct 2024 12:07 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Sat, 12 Oct 2024 12:07 PM IST
सार

आयोग ने यह भी कहा कि केवल बोर्ड का गठन करने से या यूडीआईएसई कोर्ड लेने का मतलब यह नहीं कि मदरसा आरटीई अधिनियम 2009 के प्रावधानों का पालन कर रहा है।

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Child rights panel NCPCR writes to States recommending to stop funding Madrasas news in hindi
प्रियांक कनूनगो - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 'आस्था के संरक्षक या अधिकारों के विरोधी: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे' के संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव को एक चिट्ठी लिखी। एनसीपीसीआर की रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं, जिसमें मदरसों के इतिहास और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों के अल्लंघन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मदरसों को मिलने वाली सरकारी फंडिंग बंद कर दी जानी चाहिए। 
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मदरसों को मिलने वाली फंडिंग को बंद करने की अपील
एनसीपीसीआर के प्रमुख प्रियांक कनूनगो ने कहा, "शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 में बताया गया कि सामाजिक न्याय और लोकतंत्र जैसे मूल्यों को प्राप्त करना सभी के लिए शिक्षा के प्रावधान के माध्यम से ही संभव है। बच्चों के मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार के बीच एक विरोधाभासी तस्वीर बनाई गई है।" उन्होंने आगे कहा, "इस संबंध में आयोग ने आस्था के संरक्षक या अधिकारों के विरोधी: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे शीर्षक से एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में 11 अध्याय हैं, जिसमें मदरसों के इतिहास के विभिन्न पहलुओं और बच्चों के शैक्षिक अधिकारों के उल्लंघन में उनकी भूमिका का जिक्र किया गया है।"
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आयोग ने यह भी कहा कि केवल बोर्ड का गठन करने से या यूडीआईएसई कोर्ड लेने का मतलब यह नहीं कि मदरसा आरटीई अधिनियम 2009 के प्रावधानों का पालन कर रहा है। इसलिए आयोग ने रिपोर्ट के माध्यम से यह सिफारिश की कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मदरसा को राज्य वित्त पोषण बंद कर दिया जाना चाहिए। एनसीपीसीआर की रिपोर्ट में आगे कहा गया कि सभी गैर मुस्लिम बच्चों को आरटीई अधिनियम 2009 के अनुसार मौलिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए मदरसों से बाहर निकाला जाए और स्कूलों में भेजा जाए।
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