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Gujarat: अमरेली में दिल दहलाने वाला हादसा, घर के बाहर खेल रहे पांच साल के मासूम बच्चे को शेरनी ने मार डाला
Tue, 22 Oct 2024 12:59 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरेली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Tue, 22 Oct 2024 12:59 PM IST
सार
वन अधिकारी जीएल वघेल ने बताया कि बच्चा जफराबाद तालुका के नवी जिकादरी गांव में अपने घर के बाहर खेल रहा था। उसी समय वहां एक शेरनी आ गई और उसपर हमला कर दिया।
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शेरनी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गुजरात के अमरेली जिले से एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहां एक शेरनी ने खेतिहर मजदूर के पांच साल के मासूम बच्चे को नोंच-नोंच कर मार डाला।
घर के बाहर खेल रहा था बच्चा
वन अधिकारी जीएल वघेल ने मंगलवार को बताया कि बच्चा जफराबाद तालुका के नवी जिकादरी गांव में अपने घर के बाहर खेल रहा था। उसी समय वहां एक शेरनी आ गई और उसपर हमला कर दिया। बाद में बच्चे को लेकर कहीं चली गई। काफी ढूंढने के बाद स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारी को बच्चे का शव मिला।
शेरनी की तलाश जारी
वघेल ने बताया कि बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर गए, मगर उसकी जान पहले ही जा चुकी थी। पीड़ित खेतिहर मजदूर का बेटा था।शेरनी को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
1990 से 2020 तक काफी बढ़ी शेरों की आबादी
गौरतलब है, गुजरात एशियाई शेरों का एकमात्र रहने का स्थान है। अगर वन विभाग द्वारा की गई पिछली जनगणना की माने तो यहां इनकी आबादी में 1990 में 284 से 2020 में 674 तक की वृद्धि देखी गई है। वन विभाग ने कहा है कि बाघों में से लगभग आधे संरक्षित क्षेत्रों के बाहर फैले हुए हैं (नौ जिलों और 13 वन प्रशासनिक प्रभागों में) उनका वितरण क्षेत्र 2015 में 22,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 30,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
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घर के बाहर खेल रहा था बच्चा
वन अधिकारी जीएल वघेल ने मंगलवार को बताया कि बच्चा जफराबाद तालुका के नवी जिकादरी गांव में अपने घर के बाहर खेल रहा था। उसी समय वहां एक शेरनी आ गई और उसपर हमला कर दिया। बाद में बच्चे को लेकर कहीं चली गई। काफी ढूंढने के बाद स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारी को बच्चे का शव मिला।
शेरनी की तलाश जारी
वघेल ने बताया कि बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर गए, मगर उसकी जान पहले ही जा चुकी थी। पीड़ित खेतिहर मजदूर का बेटा था।शेरनी को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
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1990 से 2020 तक काफी बढ़ी शेरों की आबादी
गौरतलब है, गुजरात एशियाई शेरों का एकमात्र रहने का स्थान है। अगर वन विभाग द्वारा की गई पिछली जनगणना की माने तो यहां इनकी आबादी में 1990 में 284 से 2020 में 674 तक की वृद्धि देखी गई है। वन विभाग ने कहा है कि बाघों में से लगभग आधे संरक्षित क्षेत्रों के बाहर फैले हुए हैं (नौ जिलों और 13 वन प्रशासनिक प्रभागों में) उनका वितरण क्षेत्र 2015 में 22,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 30,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
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