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मुख्य न्यायाधीश बोले: न्यायपालिका पर प्रायोजित व दुर्भावनापूर्ण हमले, केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई करने की जरूरत

Fri, 26 Nov 2021 09:53 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 26 Nov 2021 09:53 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश रमण, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दिल्ली के विज्ञान भवन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय संविधान दिवस समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कानूनी पेशे के रूप में अपने अनुभव के आधार पर 'न्यायपालिका के भारतीयकरण' का भी आह्वान किया।

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Chief Justice said That Sponsored and malicious attacks on the judiciary central agencies need to take action Latest News Update
NV Ramana - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने शुक्रवार को सोशल मीडिया सहित न्यायाधीशों पर बढ़ते हमलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को इस तरह के दुर्भावनापूर्ण हमलों से प्रभावी ढंग से निपटने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'न्यायपालिका के लिए गंभीर चिंता का विषय न्यायाधीशों पर बढ़ते हमले हैं। न्यायिक अधिकारियों पर शारीरिक हमले बढ़ रहे हैं। फिर मीडिया में न्यायपालिका पर हमले होते हैं, खासकर सोशल मीडिया पर।'

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उन्होंने कहा, ' हमले प्रायोजित प्रतीत होते हैं। कानून लागू करने वाली एजेंसियों, विशेष रूप से केंद्रीय एजेंसियों को ऐसे दुर्भावनापूर्ण हमलों से प्रभावी ढंग से निपटने की जरूरत है। सरकारों से एक सुरक्षित माहौल बनाने की उम्मीद की जाती है ताकि न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी निडर होकर काम कर सकें।'
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मुख्य न्यायाधीश रमण, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दिल्ली के विज्ञान भवन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय संविधान दिवस समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कानूनी पेशे के रूप में अपने अनुभव के आधार पर 'न्यायपालिका के भारतीयकरण' का भी आह्वान किया।
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उन्होंने कहा, 'न्यायिक प्रणाली, जैसा कि आज हमारे देश में मौजूद है, अनिवार्य रूप से अभी भी औपनिवेशिक प्रकृति की है। इसमें सामाजिक वास्तविकताओं या स्थानीय परिस्थितियों का सरोकार नहीं है। प्रक्रियाओं, तर्कों व फैसलों की भाषा और खर्च सभी आम आदमी को न्यायिक प्रणाली से अलग करने में योगदान दे रहे हैं। लोगों को अदालतों का दरवाजा खटखटाने में आत्मविश्वास महसूस करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों की मौजूदा रिक्तियों को भरने, अधिक से अधिक पदों के सृजन, सरकारी वकीलों और स्थायी वकील के रिक्त पदों को भरने, आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के द्वारा लंबित मामलों के 'खतरनाक' मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण का भी सुझाव दिया।

वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि देश के चार क्षेत्रों में हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय के बीच अपील की अदालतें स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अपील की अदालतें हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेंगी और यह फैसला अंतिम हो।


न्यायिक संस्थान को प्रेरित हमले से बचाने की जरूरत ...
सीजेआई एनवी रमण ने शुक्रवार को वकीलों से न्यायिक संस्थान को प्रेरित और लक्षित हमलों से बचाने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, सही के साथ व गलत के खिलाफ खड़े होने से संकोच नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संविधान दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रमण ने कहा, आपको न्यायाधीशों और संस्थान की सहायता करनी चाहिए।

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