फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Chief Justice of India Justice Surya Kant says prudence is different from knowledge

CJI: मुख्य न्यायाधीश बोले- विवेक ज्ञान से अलग है, कानून के शब्दों और मकसद को समझना जरूरी

Sun, 18 Jan 2026 10:39 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 18 Jan 2026 10:39 PM IST
विज्ञापन
Chief Justice of India Justice Surya Kant says prudence is different from knowledge
जस्टिस सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि विवेक (समझदारी) ज्ञान से अलग होता है और इसका मतलब यह जानना है कि कानून के शब्दों पर कब जोर देना है तथा कब उसके मकसद को समझना है।

विज्ञापन


 बताया- कब बोलना है और कब खामोशी असरदार
सीजेआई रविवार को कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनयूजेएस) के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। सीजेआई इसके चांसलर हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान किताबों, शायद क्लासरूम और ट्रेनिंग से जल्दी हासिल किया जा सकता है, लेकिन उसके बाद जो होता है, वह अनुभव, गलतियों और लगातार सोचने-समझने से बहुत धीरे-धीरे और अक्सर अधूरे तरीके से आकार लेता है। विवेक यह जानना है कि कब बोलना है और कब खामोशी ज्यादा असरदार होती है। 
विज्ञापन


दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि कानून के नियमों पर कब जोर देना है और कब उसके मकसद को समझना है। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जॉयमाल्या बागची व कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल भी शामिल हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम ऐसे जमाने में रह रहे हैं जहां तुरंत राय बन जाती है और बिना इंतजार किए जवाब की उम्मीद की जाती है। ऐसी दुनिया में समझदारी दुर्लभ हो गई है और इसलिए यह बहुत कीमती है। उन्होंने कहा कि जहां दक्षता निष्पक्षता के साथ मुकाबला करती है, जहां नंबरों में मापी गई प्रोफेशनल सफलता अजीब तरह से खोखली लगती है, ऐसे पलों में, सिर्फ नियम आपका मार्गदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि आपकी समझदारी करेगी। 


उन्होंने कहा कि कानूनी पेशा सिर्फ दिमागी तौर पर ही मुश्किल नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी थकाने वाला है। अपने दशकों के अनुभव के बारे में सीजेआई ने कहा कि सही समय पर आराम करने और धीमे होने की क्षमता प्रोफेशनल जिम्मेदारी से पीछे हटना नहीं है, बल्कि यह उसे बनाए रखने का एक तरीका है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed