सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बोले चिदंबरम, ऐसा लग रहा है कि मानो मैं रंगा-बिल्ला हूं
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आईएनएक्स मीडिया घोटाले से जुड़े मनी लान्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को बुधवार को भी जमानत नहीं मिल सकी। सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के दौरान चिदंबरम की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि मुझे (चिदंबरम को) रिहा करने का गलत संदेश जाएगा, मानो मैं कोई रंगा-बिल्ला सरीखा अपराधी हूं।
हिरासत में करीब 98 दिन बिता चुके वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चिदंबरम के पार्टी सहयोगी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस आर. भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।
सिब्बल ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि चिदंबरम के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह तो पूरे ट्रायल के दौरान चिदंबरम को जमानत नहीं दी जाएगी। गुरुवार को ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी ईडी का पक्ष अदालत के समक्ष रखेंगे।
सिब्बल और सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट थ्योरी (बाहर भागने, सबूत नष्ट करने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका) को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन अपराध को गंभीर बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि चिदंबरम के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं। जांच एजेंसी को उनके खिलाफ न ईमेल मिले हैं और न ही एसएमएस या कुछ और।
सिब्बल ने कहा कि जब तक कोई अति असाधारण स्थिति न हो तो अदालत को जमानत देने से इनकार नहीं करना चाहिए। अपराध की गंभीरता को सजा के ऐलान के वक्त देखा जाता है। जहां तक इस मामले का सवाल है तो इसमें महज सात साल तक की सजा का ही प्रावधान है।
कौन थे रंगा-बिल्ला
कुलजीत सिंह उर्फ रंगा और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला मुंबई के दो कुख्यात अपराधी थे, जो 1978 में आर्थर रोड जेल से छूटते ही सीधे दिल्ली आ गए थे। यहां दोनों ने ऑल इंडिया रेडिया की बिल्डिंग में प्रोग्राम पेश करने के लिए जा रहे दो नाबालिग भाई-बहन गीता व संजय चोपड़ा का फिरौती के लिए अपहरण कर लिया था।
अगस्त 1978 में रंगा-बिल्ला ने गीता व संजय के पिता के नौसेना अधिकारी होने की जानकारी मिलने पर क्रूरता पूर्वक उनकी हत्या कर दी थी। रंगा और बिल्ला को गिरफ्तार करने के बाद 1982 में फांसी दे दी गई थी।