छत्तीसगढ़: आदिवासी इलाके के स्टील प्लांट पर रार, किसके हाथ में जा सकती है 'बस्तर' के लोगों की संपत्ति
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थित 'नगरनार स्टील प्लांट' को लेकर कांग्रेस और भाजपा में रार मच गई है। कांग्रेस पार्टी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर में कहा कि 'नगरनार स्टील प्लांट' बस्तर के लोगों की संपत्ति है और वह उनके पास ही रहेगा। बतौर रमेश, सच्चाई ठीक इसके विपरीत है। वर्ष 2020 के अक्तूबर महीने में केंद्र सरकार ने नगरनार स्टील प्लांट में 50.79 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया था। ऐसे में अब छत्तीसगढ़ के लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। 14 अक्तूबर 2020 की पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उक्त निर्णय प्रधानमंत्री की ही अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति द्वारा लिया गया था। जयराम रमेश ने कहा, अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रधानमंत्री और भी झूठ बोल रहे हैं।
जल्द ही तेज होगी विनिवेश की प्रक्रिया
कांग्रेस पार्टी के महासचिव के अनुसार, इस निर्णय के क्रियान्वयन का कार्य भारत सरकार के वित्त विभाग के अंतर्गत आने वाले निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) को सौंपा गया है। डीआईपीएएम ने इसके लिए 2 दिसंबर 2022 को बोली आमंत्रित की थी। न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, नगरनार स्टील प्लांट को खरीदने के लिए पांच निजी कंपनियों ने प्रस्ताव दिए थे। उसमें से एक अदाणी समूह भी था। हाल ही में एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताभ मुखर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जल्द ही विनिवेश की प्रक्रिया तेज होगी। उनकी बातों से साफ है कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही उन कंपनियों से फाइनेंशियल बिड आमंत्रित किए जाएंगे, जिन्हें डीआईपीएएम ने शॉर्टलिस्ट किया है।
प्लांट के निजीकरण के विरोध पर पदयात्रा
कांग्रेस पार्टी, हमेशा से नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का विरोध करती रही है। पार्टी महासचिव ने कहा, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी विपक्ष में थी, तब कांग्रेस ने इस प्लांट के निजीकरण का विरोध करने और प्रभावितों की समस्याओं को लेकर 17 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली थी। उस पदयात्रा में स्थानीय किसान, मजदूर और कई संगठन एवं स्टील श्रमिक यूनियन आदि शामिल हुए थे। उस समय ही पूरे छत्तीसगढ़ में यह बात फैल गई थी कि केंद्र सरकार इस प्लांट को अदाणी को सौंपना चाहती है। तब की भाजपा सरकार पर दबाव इतना बढ़ गया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को इस प्लांट के निजीकरण का नुकसान बताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखना पड़ा था। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी हमारा स्टैंड बिल्कुल साफ है। हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई बार कह चुके हैं कि यदि केंद्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट को नहीं चला सकती, तो उसे राज्य सरकार को सौंप दे। राज्य सरकार उसे चलाएगी।
प्लांट पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च
प्लांट की स्थापना पर अब तक 20 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इतना पैसा लगाने के बाद उसे निजी हाथों में सौंपना ठीक नहीं होगा। इसे लेकर विधानसभा में शासकीय संकल्प भी पारित हो चुका है। 21 फरवरी 2021 को नीति आयोग की बैठक में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री के समक्ष यह मांग रखी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में कितना अंतर होता है, वह एक बार फिर सामने है। एक तरफ उन्होंने नगरनार स्टील प्लांट को अपने पूंजीपति मित्रों के हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी कर कर ली है। दूसरी तरफ कह रहे हैं कि यह बस्तर के लोगों की संपत्ति है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी तीन सवाल पूछना चाहती है। पहला, प्रधानमंत्री इस प्लांट को अपने पूंजीपति मित्रों को बेचने की बजाए इसे राज्य सरकार को चलाने की इजाजत क्यों नहीं देना चाहते। दूसरा, जब नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी हो चुकी है तो यह बस्तर के लोगों की संपत्ति कैसे रहेगी। तीसरा, प्रधानमंत्री इस तरह बेशर्मी से झूठ बोलना कब बंद करेंगे।