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चुनाव-रिश्वत में गया छत्तीसगढ़ कोयला घोटाले का पैसा?: ED ने कुर्क की 2.66 करोड़ की संपत्ति, अब तक 11 गिरफ्तार
Mon, 12 Jan 2026 03:56 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 12 Jan 2026 03:56 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान कथित अवैध कोयला लेवी घोटाले के मामले में ईडी ने निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया और एक अन्य व्यक्ति की 2.66 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। ईडी का आरोप है कि 540 करोड़ रुपये का इस्तेमाल चुनावी खर्च और नेताओं-अफसरों को रिश्वत देने में किया गया। जानिए पूरा मामला-
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ईडी
- फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान कथित अवैध कोयला लेवी घोटाले से जुटाए गए करीब 540 करोड़ रुपये की 'वसूली' की रकम का एक हिस्सा चुनाव से जुड़े खर्चों और नेताओं व अफसरों को 'रिश्वत' देने में इस्तेमाल किया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को यह बात कही।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि उसने इस मामले में धनशोधन की जांच के तहत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव रह चुकी निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और एक अन्य व्यक्ति की कुल 2.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुल आठ अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क किए गए हैं, जिनमें भूखंड और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।
ये भी पढ़ें: 'गांधी की विरासत ने भारत-जर्मनी को जोड़ा', साबरमती आश्रम पहुंचे जर्मन चांसलर मर्ज ने लिखा संदेश
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ईडी के मुताबिक, मामले के आरोपी सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर ने कोयले पर लगाए गए अवैध शुल्क की वसूली और अन्य उगाही से मिली अपराध की कमाई से ये संपत्तियां अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी थीं। कुर्क की गई संपत्तियों की कुल कीमत 2.66 करोड़ रुपये बताई गई है।
पूरा मामला क्या है?
आरोप है कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से निजी लोगों के एक समूह ने कोयला परिवहन करने वालों से प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध शुल्क वसूलने का एक रैकेट चलाया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस गिरोह ने अवैध तरीके से 540 करोड़ रुपये जुटाए। ईडी ने आरोप लगाया कि वसूली की गई नकदी का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्च चलाने और चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।
ये भी पढ़ें: बंगाल की चुनावी रणनीति को धार देगी कांग्रेस, 17 जनवरी बड़ी बैठक; जानें किन मुद्दों पर मंथन
कांग्रेस का क्या कहना है?
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपनी सरकार के खिलाफ राजनीतिक साजिश बताया।
अब तक जांच में क्या हुआ?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में प्रभावशाली मानी जाने वाली अधिकारी सौम्या चौरसिया और दस अन्य लोगों को इस मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। बाद में सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। ईडी इस मामले में अब तक पांच आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें 35 व्यक्तियों और कंपनियों के नाम शामिल हैं। धनशोधन का यह मामला वर्ष 2022 में बंगलूरू पुलिस की एफआईआर, 2023 में आयकर विभाग की ओर से दाखिल आरोपपत्र और 2024 में छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) की शिकायत से जुड़ा हुआ है।
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केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि उसने इस मामले में धनशोधन की जांच के तहत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव रह चुकी निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और एक अन्य व्यक्ति की कुल 2.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कुल आठ अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क किए गए हैं, जिनमें भूखंड और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।
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पूरा मामला क्या है?
आरोप है कि जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से निजी लोगों के एक समूह ने कोयला परिवहन करने वालों से प्रति टन 25 रुपये की दर से अवैध शुल्क वसूलने का एक रैकेट चलाया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस गिरोह ने अवैध तरीके से 540 करोड़ रुपये जुटाए। ईडी ने आरोप लगाया कि वसूली की गई नकदी का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्च चलाने और चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।
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कांग्रेस का क्या कहना है?
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपनी सरकार के खिलाफ राजनीतिक साजिश बताया।
अब तक जांच में क्या हुआ?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में प्रभावशाली मानी जाने वाली अधिकारी सौम्या चौरसिया और दस अन्य लोगों को इस मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। बाद में सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। ईडी इस मामले में अब तक पांच आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें 35 व्यक्तियों और कंपनियों के नाम शामिल हैं। धनशोधन का यह मामला वर्ष 2022 में बंगलूरू पुलिस की एफआईआर, 2023 में आयकर विभाग की ओर से दाखिल आरोपपत्र और 2024 में छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) की शिकायत से जुड़ा हुआ है।