{"_id":"65556334486b2bf891001220","slug":"cheetah-shifting-hunting-time-to-avoid-heat-climate-change-may-trigger-fights-among-predators-2023-11-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Climate Change: चीतों पर संकट गहराया, बढ़ते तापमान से शिकार का समय बदला; दूसरे जानवरों से बढ़ सकती है मुठभेड़","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Climate Change: चीतों पर संकट गहराया, बढ़ते तापमान से शिकार का समय बदला; दूसरे जानवरों से बढ़ सकती है मुठभेड़
Thu, 16 Nov 2023 06:02 AM IST
गुलाम अहमद
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 16 Nov 2023 06:02 AM IST
सार
नए अध्ययन में दावा किया है कि बढ़ती गर्मी की वजह से ये शिकारी जीव दिन में शिकार करने की बजाय सुबह सूरज उगने का नहीं बल्कि शाम ढलने के बाद रात में शिकार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। चीते आमतौर पर दिन के समय शिकार करना पसंद करते हैं।
विज्ञापन
चीता (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से न सिर्फ इंसान बल्कि बड़े शिकारी जीव भी सुरक्षित नहीं है। बढ़ते तापमान के चलते बड़ी बिल्लियां अपने शिकार का समय सुबह या दिन की जगह शाम या रात के समय शिफ्ट कर रही हैं। इसकी वजह से चीतों, शेर एवं तेंदुओं जैसे जीवों के बीच संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। यह स्थिति पहले ही संकट में पड़े चीतों के लिए ज्यादा खतरनाक है।
विज्ञापन
शोधकर्ता जीव वैज्ञानिकों ने ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बायोलॉजिकल साइंस’ नामक जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में दावा किया है कि बढ़ती गर्मी की वजह से ये शिकारी जीव दिन में शिकार करने की बजाय सुबह सूरज उगने का नहीं बल्कि शाम ढलने के बाद रात में शिकार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। चीते आमतौर पर दिन के समय शिकार करना पसंद करते हैं। इस तरह उनके और दूसरे बड़े शिकारियों के बीच शिकार को लेकर होने वाली मुठभेड़ का खतरा कम हो जाता है, लेकिन अब इस समयसारणी में बदलाव हो रहा है।
विज्ञापन
संघर्ष से डरते हैं चीते और छोड़ देते हैं अपना शिकार तक
शोध के अनुसार चीते केवल ताजा मांस खाते हैं। वहीं शेर और तेंदुए जैसे शिकारी खुद शिकार करने के साथ-साथ मौकापरस्त भी होते हैं, जो चीते जैसे दूसरे शिकारियों से मौका मिलने पर उनका शिकार छीन लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ चीते इन दूसरी बड़ी बिल्लियों से होने वाले संघर्ष से डरते और बचते हैं। इनका सामना होने पर वे अपना शिकार तक छोड़कर चले जाते हैं।
विज्ञापन
कई समस्याओं से जूझ रहे चीते
चीतों को जलवायु परिवर्तन, मनुष्यों द्वारा शिकार और निवास स्थान के विनाश के कारण विलुप्त होने के दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आबादी का आकार कम हो रहा है। चीतों के अपने जीन भी उनके निरंतर अस्तित्व के लिए चुनौती पैदा करते हैं। चीतों में प्रजनन सफलता की दर कम है, जिसका अर्थ है कि एक प्रजाति के रूप में वे हमेशा प्रजनन करने में सक्षम नहीं होते हैं। कम संतानों के साथ, जनसंख्या न तो बढ़ सकती है और न ही पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुकूल ढल सकती है। यही वजह है कि जहां 1975 में इनकी वैश्विक आबादी 15 हजार थी, वह अब घटकर 7 हजार से भी कम रह गई है।
53 बड़े शिकारी जीवों पर किया अध्ययन
अपने इस बहुआयामी अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चीता, शेर, तेंदुए और अफ्रीकी जंगली कुत्तों जैसे 53 बड़े शिकारियों पर जीपीएस ट्रैकर लगाए थे। जिन्हें उन्होंने आठ वर्षों तक कठिन परिश्रम करके लगातार ट्रैक किया। इसके बाद उन्होंने दर्ज जानकारी को प्रत्येक दिन रिकॉर्ड किए गए उच्चतम तापमान के आंकड़ों के साथ मिलान करके देखा। शोधकर्ताओं का दावा है कि एकांत प्रिय चीते अब दिन की वजह रात में ज्यादा शिकार करने लगे हैं। यह उनके अस्तित्व के लिए भी खतरे की घंटी है।