चीन की 'चार्ली' चाल: भारत में हो रही थी जासूसी, सरकार की नाक के नीचे करता रहा काम
हवाला कांड के तार सीधे चीन से जुड़ रहे हैं। जांच में सामने आ रहा है कि चार्ली चीनी एप वी चैट का इस्तेमाल करता था, जिसमें सभी संदेश चीनी भाषा में ही लिखे हैं।
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विस्तार
जब भारतीय फौज लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों से लोहा ले रही थी, उसी दौरान देश की राजधानी दिल्ली में एक चीनी दूसरी साजिशों को अंजाम दे रहा था। 1000 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट के मामले में चीनी नागरिक लुओ सांग से पूछताछ जारी है, जो हिंदुस्तान में अपनी पहचान छिपाकर चार्ली पैंग के नाम से रह रहा था। पहले तो ये सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग का केस लग रहा था, लेकिन पूछताछ में जो खुलासे हुए वो हैरान कर देने वाले हैं। दरअसल, सीमा पर मुंह की खाने वाला चीन अब भारत के भीतर जासूसी का 'डर्टी गेम' खेल रहा है। भारत की आंतरिक जानकारी मंगवा रहा है। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा की जासूसी करवा रहा है।
सीधे चीनी सेना से संपर्क में था जासूस
एजेंसियों का कहना है कि भारत में चार्ली पैंग के फर्जी नाम से रह रहा लुओ सांग, दरअसल यहां चीन के लिए जासूसी कर रहा था। वह दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में निर्वासित तिब्बतियों से घुल-मिलकर और उनके ठिकानों का पता लगा रहा था और इसकी जानकारी चीन की खुफिया एजेंसी MSS यानी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी को भेज रहा था। भारत में जासूसी का जाल फैलाने के अलावा चीन हमारी अर्थव्यवस्था में भी सेंध लगाना चाहता था। चीन के एजेंट के इस काला धंघे से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट हो रही थी। वह हर रोज तीन करोड़ से ज्यादा चीन भेजता था।
दलाई लामा भी थे निशाने पर
लुओ सांग उर्फ चार्ली पैंग की जासूसी के सीक्रेट मिशन का निशाना दिल्ली में मजनूं का टीला था। वह कई लामाओं को रिश्वत देकर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और उनके सहयोगियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में जुटा था। MSS इस काम के लिए उसे हवाला से पैसे भेज रही थी। चीनी एजेंसियों के निशाने पर मजनूं का टीला में रहने वाले लामा और भिक्षु थे। पैंग के ऑफिस स्टाफ ने बताया कि लामाओं को पैसे पैकेट्स में दिए जाते थे, जिनमें ढाई से तीन लाख रुपये होते थे। चीन, चार्ली पैंग द्वारा दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में दलाई लामा के दल में घुसपैठ कोशिशों में लगा हुआ था ताकि कई खुफिया जानकारी हाथ आ सके।
कैसे करता था काम?
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस समय चार्ली पैंग उर्फ लुओ सांग ने गुरुग्राम व दिल्ली में कई कंपनियां बना रखी थीं। ये फर्जी तरीके से कागजों में चीनी सामान भारत मंगा लेता था, इसके बात ये भारी मात्रा में भारतीय करेंसी को हवाला के जरिए चीन भेजता था। 2018 में गिरफ्तार होने के बाद उसे करीब छह माह बाद ही जमानत मिल गई थी, इसके बाद ये भारत में ही रह रहा था।
जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने कई और कंपनियां बना लीं थीं और हवाला रैकेट से फिर मोटी रकम भेजने लगा था, इसने कुछ भारतीय व बैंक अधिकारियों को हवाला रैकेट में शामिल किया। चीन के लिए जासूसी करने के मामले में स्पेशल सेल चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और कोर्ट में ट्रायल चल रहा है।
चार्ली ने भारतीय नामों से भारत में करीब 40 बैंक खाते खोल रखे थे और कई कंपनियों की नुमाइंदगी कर रहा था, इन्हीं कंपनियों के जरिए ये हवाला रैकेट चला रहा था। ये तीन करोड़ से ज्यादा रोज चीन भेजता था।
भारतीय युवती से रचाई शादी
चीनी नागरिक चार्ली पैंग को मजनूं का टीला से 13 सितंबर, 2018 को जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। चार्ली नेपाल के रास्ते सात वर्ष पहले भारत आया था। राष्ट्रीय राजधानी सेक्टर-19 द्वारका में रहकर हवाला व मनी एक्सचेंजर का काम करने लगा। द्वारका के पते पर इसने आधार कार्ड बनवा लिया। इस आधार कार्ड के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया। इसका पासपोर्ट खारिज हो गया तो इसने आधार कार्ड का पता मणिपुर का करवा लिया और नागालैंड की युवती से शादी कर ली। यहां से इसने सारे भारतीय कागजात फर्जी तरीके से बनवाए, इसके पास से उस समय भारतीय पते पर बनवाए गए भारतीय आधार कार्ड, पासपोर्ट, पेन कार्ड, लग्जरी कार, विजिटिंग कार्ड, 3 लाख 40 हजार रुपये, 22 हजार थाई करेंसी और 2 हजार यूएस डॉलर बरामद किए गए थे।
आईटीआई पास अलीगढ़ के राहुल को बनाया डायरेक्टर
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के खैर इलाके के गांव पीपल निवासी राहुल को चार्ली पैंग ने दो चीनी कंपनियों का डायरेक्टर और शेयर होल्डर बनाया है। यह बात पता चलते ही गांव में भूचाल मच गया। राहुल का नाम सामने आने के बाद एजेंसियां हरकत में आई और हफ्ते भर पहले एक जांच टीम उसके गांव पहुंची। मगर परिवार की माली हालत व घर की स्थिति को देखकर लौट गई और राहुल की तलाश शुरू कर दी है।
बताया गया है कि राहुल गुरुग्राम में नौकरी कर रहा है। मगर, रविवार दोपहर बाद उससे फोन पर संपर्क न होने के कारण एजेंसियों का उस पर शक गहरा गया है। पिता के 12 बीघा खेत हैं और बुग्गी चलाते हैं। उन्होंने यही बताया कि आईटीआई करने के बाद राहुल चार साल पहले दिल्ली नौकरी करने चला गया था। उसके दो छोटे भाई भी दिल्ली में ही प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करते हैं।
घर से राहुल का मोबाइल नंबर मिलने के बाद जब उससे जांच एजेंसियों, इलाका पुलिस व मीडियाकर्मियों ने अलग-अलग बात की तो उसने बताया कि वह 2019 में गुरुग्राम की एक मोटर पार्ट बनाने वाली कंपनी में नौकरी करने पहुंचा था। वहां नौकरी करने के दौरान चार महीने पहले गुरुग्राम में ही डीएलएफ सावर सिटी स्थित एक दफ्तर में एक परिचित के जरिए भेजा गया।
वहां उसकी मुलाकात सग्गू नाम के व्यक्ति से हुई। जहां उससे दूसरी नौकरी और अतिरिक्त वेतन के नाम पर उससे आधार कार्ड और पैनकार्ड लिए गए। उसके दस्तावेजों का प्रयोग कर यह सब किया गया है। चीनी कंपनी में डायरेक्टर और शेयर होल्डर होने की बात सुन राहुल खुद हैरानी जताने लगा।