फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Chandrayaan 3 Landing Scientists Contribution ISRO Responds to Vikram Lander

Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान मिशन में बहुत खास हैं 'इसरो' की '1580' आंखें, पढ़िये ‘960’ घंटे की कहानी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 23 Aug 2023 03:17 PM IST
विज्ञापन
सार
'इसरो' ने चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग के लिए प्लान 'बी' तैयार किया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लैंडिंग के वक्त कोई बाधा आए तो उसके उतारने का समय आगे बढ़ाया जा सकता है।
loader
Chandrayaan 3 Landing Scientists Contribution ISRO Responds to Vikram Lander
Chandrayaan-3 - फोटो : twitter

विस्तार

'चंद्रमा' की सतह (दक्षिणी ध्रुव) पर 'चंद्रयान-3' की सुरक्षित तरीके से सॉफ्ट लैंडिंग कराने को लेकर 'इसरो' पूरी तरह आश्वस्त है। भारत के इस मिशन पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। 'चंद्रयान-3' की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत, दुनिया में रूस, अमेरिका और चीन के बराबर आ जाएगा। इसके साथ ही दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला भारत पहला देश होगा। तीन देशों को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का मुकाम हासिल है।


अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रयान-3 की तैयारी में '1580' आंखों का बड़ा योगदान हैं। ये वे आंखें हैं, जिन्होंने एक सेकंड भी खुद को चंद्रयान 3 से अलग नहीं किया है। 14 जुलाई से लेकर अब तक इसरो के 790 वैज्ञानिक दिन-रात इस मिशन से जुड़े रहे हैं। वैज्ञानिकों ने 960 घंटे तक चंद्रयान 3 पर नजर रखी है।


स्पेस कमीशन के सदस्य डॉ. किरण कुमार ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत करते हुए कहा, 'चंद्रयान-3' को लेकर 'इसरो' बहुत आशान्वित है। इसमें सैंकड़ों वैज्ञानिकों ने दिन रात काम किया है। लैंडिंग के बाद हर पल चंद्रयान 3 पर नजर रखी गई है। कोई वैज्ञानिक अपनी शिफ्ट के बाद जब घर जाता था तो वह सोता नहीं था। उसका मन घर पर नहीं लगता था। उसे नींद नहीं आती थी। वह खुद को अपडेट रखने के लिए कंट्रोल सेंटर में बात करता था। सभी का एक ही जुनून था कि चंद्रयान 3, सुरक्षित तरीके से चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करे। चंद्रयान को कहां पर उतारना है, ये सब बातें पहले ही तय कर ली गई। 

इसरो में वैज्ञानिकों की कई टीमें अलग अलग कामों पर लगी थी। कोई चंद्रयान की दिशा देख रहा था तो कोई स्पीड। किसी को तकनीकी खराबी जांच का काम मिला तो कोई वैज्ञानिक चंद्रयान को उतारने का प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा था। मैनेज मिशन के तहत यह सब 'मिनट टू मिनट' आधार पर चलता रहा। रॉकेट छोड़ने के बाद तो कई टीमों ने लैंडर से नजर नहीं हटाई। इसरो के कंट्रोल सेंटर में लगभग दो सौ वैज्ञानिकों की टीम पल पल नजर रख रही थी। अगर चंद्रयान 3 की प्लानिंग की बात करें तो उसमें 790 से अधिक वैज्ञानिक शामिल रहे हैं। 

'इसरो' ने चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग के लिए प्लान 'बी' तैयार किया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लैंडिंग के वक्त कोई बाधा आए तो उसके उतारने का समय आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ये प्लान तभी अमल में लाया जाएगा, जब चंद्रमा पर विशालकाय आकार का कोई गड्ढा यानी क्रेटर सामने होगा। हालांकि इसरो ने चट्टान और विशाल गड्ढे से भी निपटने का इंतजाम किया है। अंतिम क्षण में सॉफ्ट लैंडिंग की प्रक्रिया को तीन चार दिन तक बढ़ाया जा सकता है। अगर क्रेटर ज्यादा बड़ा और गहरा नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं होगी। लैंडर और रोवर के सोलर पैनल को पर्याप्त धूप यानी एनर्जी मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed