फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   chamoli disaster will be discussed at the Climate Control Summit in Glasgow in November 2021

ग्लॉसगो शिखर सम्मेलन में तय होगा कि अब हिमालय में और 'चमोली' न बनें, विशेषज्ञ देंगे राय

Fri, 12 Feb 2021 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 12 Feb 2021 05:13 PM IST
सार

  • इसी साल ग्लॉसगो में होने वाले क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में होगी चर्चा
  • हिमालय क्षेत्र में पड़ने वाले असर से अंदाजा लगता है कि किस कदर पर्यावरण का स्तर खतरनाक हो गया है

विज्ञापन
chamoli disaster will be discussed at the Climate Control Summit in Glasgow in November 2021
चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवंबर में ग्लॉसगो में होने वाले क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में चमोली की चर्चा होगी। जलवायु परिवर्तन के सीधे तौर पर हुए असर को समझने के लिए 'चमोली ग्लेशियर त्रासदी' को विषय बनाया जा रहा है। दुनिया भर के विशेषज्ञ इस क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। जलवायु परिवर्तन पर होने वाली शिखर सम्मेलन में हिमालय क्षेत्र पर हर बार चर्चा होती है। इस बार इसमें शामिल होने वाले विशेषज्ञ हिमालय क्षेत्र में होने वाली चमोली त्रासदी और इसके कारण की बनी पस्थितियों पर नियंत्रण लगाने के उपायों को अमल में लाने की रूपरेखा भी तय होगी।

विज्ञापन


जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले उसके दुष्प्रभावों से दुनिया के सभी मुल्क प्रभावित हैं। हर मुल्क इस शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी के वक्त उसके प्रभाव, परिणामों और रोकथाम के बारे में चर्चा करते हैं। हिमालय क्षेत्र को हमेशा क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में रखा जाता है। यहां पिघलते हुए ग्लेशियरों की कम हो रही संख्या और नदियों में आने वाली बाढ़ के साथ-साथ मध्यम ऊंचाई के पहाड़ों पर ग्लेशियरों की समाप्त होने वाली संख्या भी चर्चा का विषय रहती है।
विज्ञापन


इस बार चमोली की त्रासदी पर क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में चर्चा की जाएगी। पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक बढ़ते तापमान के चलते पिघलते ग्लेशियर और इस वजह से चमोली में हुई त्रासदी ताजातरीन मसला होगा। इस वजह से ऐसी घटनाएं न हो, उसके लिए विशेषज्ञों की राय बहुत जरूरी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बार होने वाली क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन कई मायनों में बहुत अहम है। सबसे अहम इसलिए भी है क्योंकि पूरी दुनिया में लॉकडाउन की वजह से पर्यावरण में क्या सुधार आया, वह बहुत बड़ा विषय इस शिखर सम्मेलन में रहेगा। पिघलते ग्लेशियरों पर काम करने वाले पर्यावरणविद एसवाई सोनम बताते हैं यह पहला शिखर सम्मेलन होगा जिसमें उदाहरण के तौर पर यह बताया जा सकेगा कि अगर इंसान चाहे तो प्रदूषण कम कर के पर्यावरण को सुरक्षित रख सकता है। वजह बताते हुए वह कहते हैं कि लॉकडाउन में पूरी दुनिया में प्रदूषण का स्तर बहुत कम हो गया था। उसके बाद जैसे ही लॉकडाउन हटना शुरू हुआ प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हो गया।


सोनम कहते हैं बीते डेढ़ दशक में जिस तरीके से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं वह मानव सभ्यता के लिए बहुत बड़ा खतरा है। दो साल पहले जर्मनी के बॉन में क्लाइमेट कंट्रोल शिखर सम्मेलन में इस विषय पर चर्चा हुई थी। तो यह निश्चित है इन दो सालों में कहां कहां क्या पर्यावरणीय घटनाएं हुईं, क्या परिणाम रहे और उस पर कैसे कंट्रोल लगाया जाए इस पर चर्चा होनी तय है। सोनम कहते हैं कि विशेषज्ञ अपनी राय देंगे ताकि चमोली जैसी घटनाएं और ज्यादा देखने को ना मिलें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed