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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: अगर सेना सीमा तक मिसाइल लॉन्चर नहीं ले जा सकती तो फिर युद्ध कैसे लड़ेगी

Thu, 11 Nov 2021 10:21 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 11 Nov 2021 10:21 PM IST
सार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चीन ने सीमा के उस पार तिब्बत क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण किया है और भारतीय सेना को 1962 जैसी युद्ध की स्थिति से बचने के लिए चीन सीमा तक भारी वाहनों और हथियारों को ले जाने के लिए चौड़ी सड़कों की जरूरत है।

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Centre told Supreme Court if Army can not move missile launchers to China border how will it fight war over Chardham Project
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर सेना भारत-चीन सीमा पर अपने मिसाइल लॉन्चर और भारी मशीनरी नहीं ले जा सकती है तो फिर वह सीमा की सुरक्षा कैसे करेगी और नौबत आने पर युद्ध कैसे लड़ेगी। चारधाम राजमार्ग परियोजना के निर्माण के कारण हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए केंद्र ने कहा कि आपदा को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। देश के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं और इसके पीछे विशेष रूप से सड़क निर्माण जिम्मेदार नहीं है।

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लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस 900 किलोमीटर लंबी चारधाम परियोजना का लक्ष्य उत्तराखंड में स्थित चार पवित्र शहरों में सभी मौसमों के दौरान संपर्क सेवा उपलब्ध कराना है। ये चार शहर यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन शहरों में आते हैं। एनजीओ सिटिजेन्स फॉर ग्रीन दून ने एक याचिका में सड़कों के चौड़ीकरण के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पहले के आदेश में क्षेत्र में भूस्खलन कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर लिखित प्रस्तुतिकरण देने को कहा था।
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चीन ने तैयार किया बुनियादी ढांचा, अच्छी सड़कें सेना की जरूरत
रक्षा मंत्रालय ने एनजीओ सुप्रीम कोर्ट से इसके पहले के आदेश में बदलाव करने की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की थी, जिस पर न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, सूर्यकांत और विक्रम नाथ की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर हालिया घटनाक्रमों के चलते सेना को बेहतर सड़कों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सीमा के उस तरह चीन ने बुनियादी ढांचा तैयार किया है और हवाई पट्टियों, हेलिपैड, सड़कों के साथ रेलवे लाइन नेटवर्क का भी निर्माण किया है। 
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1962 में जैसी स्थिति थी वैसी दोबारा नहीं बननी चाहिए: वेणुगोपाल
वेणुगोपाल ने पीठ से कहा, सेना की समस्या यह है कि उसे सैनिकों, टैंकों, भारी तोपखाने और मशीनरी को एक जगह से दूसरी जगह से जाने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि अब उस तरह के हालात नहीं होने चाहिए जैसे साल 1962 में थे जब सीमा तक राशन की आपूर्ति करने के लिए पैदल जाना की साधन था। उन्होंने कहा कि अगर सड़क दो लेन की नहीं है तो इसे बनाने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए सात मीटर (या 7.5 मीटर अगर मार्ग उठा हुआ है) की चौड़ाई के साथ दोहरी लेन वाली सड़क का निर्माण करने की अनुमति दी जानी चाहिए।


दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस पर 16 नवंबर तक पेड़ न गिराने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि गणेशपुर-देहरादून मार्ग (एनएच-72ए) पर 16 नवंबर तक कोई पेड़ नहीं गिराया जाना चाहिए। यह मार्ग दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे से निपटने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से अपनाए जा रहे तरीके पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि एनजीटी आज कल जिस तरह के आदेश पारित कर रहा है वह बिल्कुल संतोषजनक नहीं है। अदालत ने कहा कि हम मामले की सुनवाई करेंगे और याचिका को एनजीटी के पास भेजने के बजाय इसका निपटारा करेंगे।

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